बांग्लादेश की जेल से 11 साल बाद रिहा होगा दरभंगा का सतीश

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आखिरकार प्रख्यात मानवाधिकार कार्यकर्ता विशाल रंजन दफ्तुआर के अथक प्रयास से बांग्लादेश की जेल में पिछले 11 वर्षो से कैद दरभंगा के एक गरीब परिवार का मानसिक रूप से बीमार लड़का सतीश चौधरी 12 सितम्बर को मुक्त हो रहा है।बांग्लादेश की सरकार ने ढाका स्थित हाई कमीशन आफ इंडिया को सूचित किया है कि 12 सितम्बर को दर्शना गेडे बॉर्डर पर बॉर्डर गार्डस बांग्लादेश सतीश चौधरी को बार्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) के हवाले करेगा। हाई कमीशन बांग्लादेश ने इसकी सूचना टेलीफोन से दी। सतीश को रिसीव करने के लिए विशाल रंजन दफ्तुआर बांग्लादेश बॉर्डर के लिए रवाना हो चुके हैं। उनके साथ सतीश का भाई मुकेश चौधरी भी रहेगा। गौरतलब है कि वर्ष 2008 में सतीश चौधरी इलाज के लिए पटना आया था और फिर वह अचानक गायब हो गया। उसकी काफी खोजबीन की गयी, लेकिन कोई पता नहीं लग सका। वर्ष 2012 में जानकारी मिली की सतीश बांग्लादेश की जेल में बंद है। उसे छुड़ाने के लिए छोटे भाई मुकेश चौधरी ने कई साल तक प्रयास किया। वर्ष 2012 में मुकेश ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी मुलाकात की और उन्हें पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा। थक-हारकर मुकेश ने मानवाधिकार कार्यकर्ता विशाल रंजन दफ्तुआर को पत्र लिखा। दफ्तुआर ने त्वरित संज्ञान लेते हुए बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना, चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखा, जिस पर त्वरित कारवाई हुई। चीफ जस्टिस के स्तर से जनहित याचिका सेक्शन को भेजी गयी और पीएमओ ने विदेश मंत्रालय को निर्देश दिया। विदेश मंत्री के स्तर पर इसे हाई कमीशन ऑफ इंडिया और बांग्लादेश को कारवाई के लिए भेजा गया। इसके बाद भारतीय उच्चायोग और बांग्लादेश के काउंसलर गौतम विास ने विशाल दफ्तुआर से बात की और सतीश का नागरिकता प्रमाण पत्र उपलब्ध करवाने का अनुरोध किया। दफ्तुआर की ओर से 14 अगस्त को कागजात उपलब्ध करवा दिये गये। इस बीच, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के स्तर से मामले को राज्य के गृह सचिव और दरभंगा के डीएम को कारवाई के लिए भेजा गया। इस बारे में दफ्तुआर ने कहा कि अगर नागरिकता प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने में विलंब नहीं होता, तो 15 अगस्त तक सतीश चौधरी मुक्त हो गया होता।

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