फ्लैट आवंटन मामले में हस्तक्षेप से कोर्ट का इनकार

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हाईकोर्ट ने हाउसिंग बोर्ड के खाली पड़े प्लॉट व फ्लैटों के आवंटन मामले में हस्तक्षेप करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि यह सरकार व कार्यपालिका का नीतिगत मामला है जो कई निकायों से जुड़ा है। जनहित याचिका के तहत इसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है। मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन व न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद की पीठ ने यह कहते हुए अधिवक्ता मणिभूषण प्रताप सेंगर की याचिका निपटा दी। पीठ ने अधिवक्ता से कहा कि वे इस मुद्दे को संबंधित अधिकारी के समक्ष उठा सकते हैं। इससे पहले गत वर्ष के 19 जून को हाउसिंग बोर्ड से उसके फ्लैट व प्लॉटों की संख्या, कितने आवंटित किये गये व कितने खाली हैं, के बारे में बताने को कहा था। साथ ही प्लॉट व फ्लैटों पर हुये अवैध कब्जे व उन्हें हटाने के लिए उठाये गये कदमों की जानकारी देने को कहा था। अतिक्रमण हटाने को लेकर मुकदमे दाखिल किये गये हैं तो उसकी भी जानकारी देने को कहा। बोर्ड ने न्यायालय में हलफनामा दाखिल कर कहा था कि राज्य में उसके 2274 व पटना में 1554 फ्लैट खाली पड़े हैं। बिहार-झारखंड के समय 10 फीसदी फ्लैट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित थे। वर्ष 2000 में बिहार झारखंड के अलग होने पर लगभग 16 वर्ष बाद 25 नवम्बर, 2016 को अनुसूचित जनजाति का प्रतिशत घटा दिया गया। इस वजह से कोई भी खाली फ्लैट किसी को आवंटित नहीं किया गया। बोर्ड ने पूरे राज्य में 5872 फ्लैट होने की बात कही है जिसमें से 528 एचआईजी, 1480 एमआईजी, 2616 एलआईजी व 1248 आर्थिक रूप से कमजोर वालों के लिए आरक्षित होने की बात कही है। इसमें से 3598 फ्लैट आवंटित होने व 2274 खाली होने की बात कही है। पटना के 4840 फ्लैटों में से 528 एचआईजी, 1432 एमआईजी, 2112 एलआईजी व आर्थिक रूप से कमजोर के लिए 768 फ्लैट होने की बात कही है। इन फ्लैटों में से 3286 फ्लैट आवंटित व 1554 खाली हैं। पूर्व सैनिकों के लिए 10 फीसद फ्लैट आरक्षित हैं, लेकिन पत्रकारों के लिए आरक्षण नहीं है। मालूम हो कि बोर्ड ने ही आरटीआई से मांगी गयी जानकारी में कहा था कि पत्रकार कोटे में भी कुछ फ्लैट आरक्षित हैं। बोर्ड ने स्वीकार किया था कि उसके कई फ्लैटों को अनधिकृत रूप से लोगों ने कब्जा लिया है और कई जर्जर स्थिति में हैं। अनधिकृत रूप से फ्लैट कब्जाने वालों को हटाने के लिए प्रशासन से मदद ली जा रही है और कानूनी प्रक्रिया अपनायी जा रही है। मालूम हो कि राष्ट्रीय सहारा ने गत वर्ष 9 जुलाई को यह खबर प्रमुखता से छापी थी। याचिकाकर्ता ने कहा है कि हाउसिंग बोर्ड ने पटना सहित सूबे के कई शहरों में हजारों करोड़ रुपये खर्च कर फ्लैट बनवाये और उन्हें किसी को आवंटित नहीं किया। इस वजह से आम जनता का पैसा बर्बाद हो गया।

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