G-7 का सदस्य नहीं है भारत, फिर भी पीएम मोदी को क्यों किया गया आमंत्रित?

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जी-7 (G-7) में भारत सदस्य नहीं है. इसके बावजूद भारत को आमंत्रित किया गया है. इसके पीछे कारण भारत की वैश्विक पटल पर बढ़ती ताकत है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सम्मेलन में शामिल होने के लिए फ्रांस के बिआरिट्ज शहर पहुंच गए हैं. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस बार सदस्य देशों के अलावा उन देशों को भी आमंत्रित किया है जो दुनिया की राजनीति में मजबूत स्थान रखते हैं. भारत का इस लिस्ट में पहले नंबर पर नाम है. इस शिखर सम्मेलन में भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और स्पेन को भी बुलाया गया है. वहीं अफ्रीकी देशों की बात करे तो रवांडा और सेनेगल इस शिखर सम्मेलन में शिरकत करेंगे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज फ्रांस में होने जा रही G-7 की बैठक में हिस्सा लेंगे। इस दौरान पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के बीच द्विपक्षीय बातचीत भी हो सकती है, संभव है कि इसमें मोदी और ट्रंप के बीच कश्मीर के मुद्दे पर चर्चा हो। सात अमीर मुल्कों के इस समूह (G-7) की बैठक में भारत विशेष आमंत्रित सदस्य है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती और ट्रेड वॉर को लेकर बढ़ती चिंता के कारण भी आज दुनिया की नजर इस बैठक पर है। अटलांटिक महासागर तट के सुरम्य शहर बिआरित्ज में जब एक मंच पर आएंगे तो दुनिया ट्रेड वॉर पर को लेकर सकारात्मक नतीजों की उम्मीद करेगी, क्योंकि इसका असर वैश्विक है। G-7 में फ्रांस, जर्मनी, यूके, इटली, अमेरिका, कनाडा और जापान शामिल हैं।विकसित देशों के समूह की इस सालाना बैठक में अमेजन के जंगलों में लगी आग, ब्रेक्सिट के डेडलॉक को खत्म करने और व्यापार तनाव में कमी लाने जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श होगी। सम्मेलन के आधिकारिक शुरुआत से कुछ घंटे पहले फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने टेलिविजन पर जनता को संबोधित करते हुए जोर दिया कि अमेजन के जंगलों में लगी आग अजेंडा में सबसे ऊपर है और उन्होंने दावा किया कि ‘हमारे घर जलाए जा रहे हैं।’ फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा, ‘जलवायु और जैव विविधता G-7 का दिल है। अमेजन में जलाए जा रहे जंगल और समुद्र हमें पुकार रहे हैं। हमें उन्हें ठोस जवाब देना होगा। इन विषयों पर खाली बातचीत का वक्त नहीं है, बल्कि कुछ ठोस काम करना होगा।’

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बता दें कि जी-7 के सदस्य है, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान, ब्रिटेन, इटली और अमेरिका. जी-7 दुनिया के सात विकसित देशों का एलीट क्लब है. जो विश्व की अर्थव्यवस्था की दिशा तय करती है. इन देशों का दुनिया की 40 प्रतिशत जीडीपी पर कब्जा है.

भारत का दुनिया में बज रहा डंका

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों की पांच दिवसीय यात्रा पर हैं. यह दौरा 22 अगस्त से 26 अगस्त तक रहेगा. विदेश मंत्रालय ने बताया कि जी-7 में भारत को न्यौता बड़ी आर्थिक शक्ति और फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के साथ निजी संबंध का सबूत है. इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी जलवायु, वातावरण समुद्री सुरक्षा और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर सेशन को संबोधित करेंगे.

जी-7 सम्मेलन हुआ शुरू

जी-7 शिखर सम्मेलन के आधिकारिक रूप से रविवार को शुरू होने के साथ सभी नेताओं ने गोलमेज चर्चा में भाग लिया. इसमें यह सामने आया कि फ्रांस के राष्ट्रपति एमानुएल मैक्रों को ईरान से परमाणु समझौते को लेकर वार्ता का नेतृत्व करने का कार्य सौंपा गया.फ्रांस, इटली, जर्मनी, ब्रिटेन,अमेरिका, कनाडा, जापान व यूरोपीय संघ (ईयू) के प्रमुखों ने शिखर सम्मेलन की शुरुआत अपनी बैठक के चित्र और ट्वीट ‘यह कार्रवाई करने का समय है’ से की.मैक्रों को वार्ता आयोजित करने व ईरान को संदेश देने का कार्य सौंपा गया है.

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मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो जी-7 बैठक के इतर अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी के बीच मुलाकात हो सकती है. दोनों के बीच कश्मीर मुद्दे को लेकर बातचीत होने की संभावना है.

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