फसल अवशेष जलायी तो नहीं मिलेगा सरकारी लाभ: मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जलवायु परिवर्तन को लेकर गहरी चिंता जतायी है। इसके लिए उन्होंने पर्यावरण से हो रहे छेड़छाड़ खासकर किसानों द्वारा खेतों में फसलों के अवशेष जलाने को मुख्य वजह बतायी है। फसल अवशेष प्रबंधन पर ज्ञान भवन में सोमवार को आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने राज्य के किसानों से अपील की है कि वे फसलों के अवशेष (पराली) को किसी भी कीमत पर नहीं जलायें, क्योंकि इसकी वजह से पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि पराली जलाने वालों किसानों को राज्य सरकार की ओर से किसी प्रकार की सहायता राशि नहीं दी जायेगी। किसानों की आमदनी बढ़े, इसके लिए सरकार प्रयासरत है। कृषि यंत्रों पर अनुदान की राशि बढ़ाकर 75 फीसद कर दी गयी है। यह भी ध्यान में रखा जा रहा है कि किसानों को उनकी फसलों के साथ-साथ अवशेषों की कीमत भी मिले। सीएम ने कहा कि दरअसल, खेतों में पुआल जलाने के बाद हो रहे पर्यावरण प्रदूषण को रोकने और किसानों को जागरूक करने के लिए इस सम्मेलन का आयोजन किया गया है। इसके माध्यम से किसानों को जागरूक किया जायेगा कि वे अपने खेतों में पराली जलाने का काम नहीं करें। इससे पर्यावरण का तो नुकसान होता ही है, साथ-साथ खेतों की उर्वरा शक्ति भी खत्म होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार जलवायु परिवर्तन से बुरी तरह प्रभावित है। जलवायु परिवर्तन के कारण जहां बिन मौसम बारिश से पटना में जल-जमाव हुआ, वहीं बाढ़ और सूखे की समस्या की उत्पन्न हुई। जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा कारण पुआल जलाना है। पराली जलाने से जो समस्या उत्पन्न होती है, उससे कई राज्य ग्रस्त हैं। धीरे-धीरे यह समस्या बिहार में भी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि बिहार में कृषि की उपज कम थी, लेकिन कृषि रोड मैप बनने के बाद से उत्पादन बढ़ा है। मुख्यमंत्री ने राजधानी पटना में हुए जलजमाव पर कहा है कि अचानक हुई बारिश के कारण ही पटना की स्थिति खराब हुई। जुलाई महीने में ही जिस तरह से कई जिलों में बाढ़ आई थी, उससे हमें अंदेशा हो गया था कि सितम्बर माह में कुछ न कुछ होगा और वह हुआ भी। उन्होंने कहा कि सितम्बर महीने में जिस तरह से पटना में बारिश हुई, इस बारे में कोई सोच भी नहीं सकता था। पटना में हुई 380 मिमी की बारिश ने पूरे शहर को जलमग्न कर दिया। पटना के अधिकतर इलाके कई दिनों तक पानी में डूबे रहे। घरों के अंदर भी पानी घुस गया। यह सारी गड़बड़ी पर्यावरण के साथ किये जा रहे खिलवाड़ की वजह से हो रही है। स्थिति यह है कि ऐसी परेशानियों के बावजूद अब भी पर्यावरण के साथ खिलवाड़ हो रहा है। पर्यावरण की सुरक्षा के प्रति लोगों में जागरूकता कम है। आराम और मौज के चक्कर में पर्यावरण की चिंता किसी को नहीं है। पर्यावरण को बचाने के लिए जागरूकता पैदा करने और अभियान चलाने की जरूरत है। कृषि अवशेषों को जलाने से पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। इस पर रोक लगाने के लिए किसानों को जागरूक करने की जरूरत है। इसके लिए सरकार की ओर से कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है, लेकिन उसका खास असर देखने को नहीं मिल रहा। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि अपने-अपने जिले में कैम्पेन चलाकर किसानों को इसके प्रति जागरुक करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का बिहार पर कम असर पड़े, इसी के मद्देनजर ‘‘जल-जीवन और हरियाली’ अभियान की शुरुआत की गयी है। 11 सूत्री कार्यक्रम बनाया गया है। यह तीन वर्षो का कार्यक्रम है। राज्य में 26 अक्टूबर से यह शुरू हो जायेगा।

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