फल-फूल और सब्जियों का उत्पादन कर किसान बनें सशक्त : राज्यपाल

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PATNA RAJ BHVAN MEIN AYOJIT UDHAN PERDERSHANI KA UDGHATAN KERTE RAJPAL LALJI TONDON

राज्य में कृषि के विविधीकरण तथा इसके अनुषंगी प्रक्षेत्रों के विकास की भी आवश्यकता है। खाद्यान्न-उत्पादन के साथ-साथ फल, फूल, सब्जी, सुगंधित एवं औषधीय पौधों के उत्पादन के जरिये भी किसानों का आर्थिक सशक्तीकरण हो सकता है।’ उक्त बातें राज्यपाल लाल जी टंडन ने राजभवन के राजेन्द्र मंडप में आज आयोजित ‘‘राज्यस्तरीय उद्यान प्रदर्शनी’ का उद्घाटन करते हुए कही।राज्यपाल ने कहा कि राजभवन, पटना को भी फल, फूल, सब्जी, सुगंधित एवं औषधीय पौधों की खेती के मामलों में एक मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस वर्ष से उद्यान-प्रदर्शनी आयोजन की नई शुरुआत हो चुकी है। अगले वर्ष से यह प्रदर्शनी और अधिक बड़े पैमाने पर 4-5 दिनों के लिए आयोजित होगी, ताकि अधिकाधिक लोग इसका अवलोकन कर सकें और किसानों की प्रतिभागिता में भी विस्तार हो। राज्यपाल कहा कि राजभवन परिसर में विभिन्न नक्षत्र-ग्रहों के अनुसार पौधे लगाकर ‘‘ नक्षत्र वाटिका’ एवं विभिन्न प्रजाति के कमल लगाते हुए ‘‘ कमल वाटिका’ भी विकसित की जायेगी। उन्होंने कहा कि सिन्दूर, रुद्राक्ष, बरगद, पीपल, पाकड़ आदि के पौधे भी लगाये जाएंगे, जिनसे पर्यावरण शुद्धीकरण होता है। पर्यावरण-संतुलन, पोषण, स्वास्य और आनंद आदि की दृष्टि से भी पौधे लगाये जाने चाहिए। श्री टंडन ने कहा कि रासायनिक खादों की जगह आज जैविक खादों के उपयोग का प्रचलन बढ़ रहा है। उन्होंने ‘‘गो-पालन’ की भी अपील करते हुए कहा कि एक गाय पालने से 10 एकड़ भूमि के लिए जैविक खाद की प्राप्ति हो जाती है तथा दूध-दही मिठाई जैसी खाद्य-सामग्रियां भी मिल जाती हैं। ‘‘जीरो बजट’ कृषि का मॉडल भी आज देश में तैयार हो गया है, जिससे जैविक खेती को पर्याप्त बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने खस, लेमनग्रास आदि सुगंधित पौधों के जरिये भी लाखों की आमदनी होने की बात करते हुए कहा कि किसानों को खाद्यान्न-उत्पादन के अलावा सुगंधित एवं औषधीय पौधों के उत्पादन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। श्री टंडन ने स्ट्राबेरी, मशरूम आदि की खेती की बिहार में बड़े पैमाने पर हो रही शुरुआत की प्रशंसा की और कहा कि इससे किसानों की माली हालत में भी सुधार होगा और राज्य का भी तेजी से विकास होगा। राजभवन में आज आयोजित ‘‘उद्यान प्रदर्शनी’ में पूरे राज्य के विभिन्न जिलों से आये सैकड़ों प्रगतिशील कृषकों आदि ने भाग लिया। कार्यक्रम में बिहार कृषि विवविद्यालय के कुलपति डॉ. अजय कुमार सिंह ने बताया कि आज की ‘‘उद्यान प्रदर्शनी’ में कुल 521 प्रदशोर्ं को शामिल किया गया था, जिसमें फलों के 84, फूलों के 92 तथा सुगंधित एवं औषधीय पौधों एवं अन्य के कुल 110 प्रदर्श शामिल थे। प्रदर्शनी कुल 7 समूहों -सब्जी, फल, पत्तेदार पौधे (गमलों में) मौसमी फूल, मौसमी फूल (डंठल सहित), सुगंधित एवं औषधीय पौधे तथा मालियों के लिए गुलदस्ता बनाने, बटन होल, माला आदि तैयार करने से जुड़े प्रदर्श शामिल किए गये थे। प्रदर्शनी में लगभग 80 प्रदशरे को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कारों से सम्मानित भी किया गया। प्रथम पुरस्कार के रूप में 3000 रुपये, द्वितीय पुरस्कार के रूप में 2000 रुपये एवं तृतीय पुरस्कार के रूप में 1000 रुपये के पुरस्कार प्रदान किये गये। ऑर्नामेंटल कैबेज, गुड़हल, डहेलिया, पैन्जी, पिटूनिया, गुलाब, बेल एवं नींबू प्रदर्श के प्रथम पुरस्कार राजभवन उद्यान को प्राप्त हुए, जबकि राकेश कांत को अफ्रीकन गेंदा, रमाकांत को फ्रेंच गेंदा, एसके सिंह को डहेलिया, संजय चौधरी एवं गुलाब मेहता को केला, महेश प्रसाद सिंह को बेर, प्रीतम कुमार को पपीता, मृत्युंजय कुमार सिंह को अमरूद, बृजकिशोर प्रसाद महतो को स्ट्राबेरी, रघुनंदन पोद्दार को फूलगोभी, नागेन्द्र सिंह को बनेभी, राजेश को ब्रोकली, मृत्युंजय को माला-निर्माण एवं गाजर, राघवारण प्रसाद सिंह को टमाटर, शशिभूषण सिंह को सेम, अजय कुमार प्रसाद को हल्दी, नकुल सिंह को मिर्च, मृत्युंजय सिंह को शिमला मिर्च, संतोष कुमार शर्मा को बैंगन तथा संजय कुमार सिंह को ओल के सवरेत्कृष्ट प्रदशरे के लिए पुरस्कार प्रदान किए गये। उद्यान प्रदर्शनी के उद्घाटन कार्यक्रम में कृषि विभाग के प्रधान सचिव सुधीर कुमार, राज्यपाल के प्रधान सचिव विवेक कुमार सिंह, उद्यान निदेशक नंद कुमार, बिहार कृषि विविद्यालय, सबौर के कुलपति डॉ. अजय कुमार सिंह सहित राज्यपाल सचिवालय, कृषि विभाग तथा बिहार कृषि विविद्यालय के वरीय अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, कृषि सलाहकार आदि भी उपस्थित थे। प्रदर्शनी में लगभग 400 किसानों ने भाग लिया, जबकि ऑनलाईन रजिस्ट्रेशन के जरिये लगभग 350 दर्शनार्थियों ने भी इस दो दिवसीय ‘‘उद्यान प्रदर्शनी’ का अवलोकन राजभवन पहुँचकर किया।

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