प.बंगाल के दमदम में आज मेरी रैली है, देखता हूं कि दीदी होने देंगी या नहीं : PM मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को यूपी के मऊ में बीजेपी की चुनावी रैली की. इस दौरान उन्‍होंने पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी को आड़े हाथों लिया. उन्‍होंने इस दौरान कहा, ‘दमदम में आज मेरी चुनावी रैली है, देखता हूं कि दीदी होने देंगी या नहीं.’

उन्‍होंने बीजेपी अध्‍यक्ष अमित शाह के रोड शो के दौरान हुई हिंसा पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘कुछ महीने पहले जब पश्चिम मिदनापुर में मेरी सभा थी तो वहां टीएमसी के गुंडों द्वारा अराजकता फैलाई गई थी. इसके बाद ठाकुरनगर में तो ये हालत कर दी गई थी कि मुझे अपना संबोधन बीच में छोड़कर मंच से हट जाना पड़ा था.’

पीएम मोदी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के गुंडों की ये दादागीरी परसों रात भी देखने को मिली है. परसों कोलकाता में भाई अमित शाह के रोड शो के दौरान टीएमसी के गुंडों ने ईश्वर चंद विद्यासागर की मूर्ति को तोड़ दिया. ऐसा करने वालों को कठोर से कठोर सजा दी जानी चाहिए. उन्‍होंने कहा कि सत्ता के नशे में ममता दीदी लोकतंत्र विरोधी मानसिकता में बंगाल में सब कुछ कर रही है. दीदी का रवैया तो मैं बहुत दिनों से देख रहा हूं, अब इसे पूरा देश भी देख रहा है.

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पीएम मोदी ने मऊ में रैली के दौरान सपा अध्‍यक्ष अखिलेश यादव और बसपा अध्‍यक्ष मायावती पर भी निशाना साधा. सपा-बसपा-रालोद के गठबंधन पर हमला बोलते हुए उन्‍होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में सपा बसपा ने जाति के आधार पर एक अवसरवादी गठबंधन किया. लखनऊ में एसी कमरे में बैठकर तो डील हो गई, लेकिन जमीन से कटे हुए ये नेता अपने कार्यकर्ताओं को भूल गए. जिसका ये नतीजा निकला कि सपा और बसपा के कार्यकर्ता आज भी एक दूसरे पर हमले कर रहे हैं.

उन्‍होंने कहा कि अब बुआ हों या बबुआ हों, इन लोगों ने खुद को गरीबों से इतना दूर कर लिया है, इन्होंने अपने आसपास पैसे की, वैभव की और अपने दरबारियों की इतनी बड़ी दीवार खड़ी कर ली है कि अब इन्हें गरीबों का दुख नजर नहीं आता है.

उन्‍होंने कहा कि वो महामिलावटी जो महीने भर पहले तक मोदी हटाओ का राग अलाप रहे थे, वो आज बौखलाए हैं. उनकी पराजय पर देश ने मुहर लगा दी है. उत्तर प्रदेश ने तो इनका सारा गणित ही बिगाड़ दिया है. मोदी हटाओ का नारा तो महामिलावटियों का बहाना था, असल में इन्हें अपने अपने भ्रष्टाचार के पाप को छुपाना था, इसलिए ये कोशिश कर रहे हैं कि देश में जैसे-तैसे खिचड़ी सरकार बन जाए. ये एक मजबूर सरकार चाहते थे, जिसे वो अपनी जरूरत के हिसाब से ब्लैकमेल कर सकें.

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