‘पेशेवर जांच और जांच के दुस्साहस में आधारभूत अंतर है

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केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली के हालिया ब्लॉग के बाद देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है. सीबीआई पर राजनीतिक दबाव में काम करने और पिंजड़े का तोता होने के आरोप पहले भी लग चुके हैं.  केंद्र सरकार में नंबर 2 की हैसियत रखने वाले मंत्री अरुण जेटली का सीबीआई पर इस तरह का आरोप इस जांच एजेंसी की विश्वसनीयता की ताबूत में आखिरी कील न साबित हो जाए. साफ है जेटली के बयान पर रजनीति तो होगी ही, क्योंकि वह नेता हैं. लेकिन अगर हम उनके इस बयान को देश के एक काबिल वकील के नजरिए से देखें तो इसमें ऐसा बहुत कुछ है, जिस पर गंभीरता से सोचने की जरूरत है. यहां एक बात तो शीसे की तरह साफ है कि दुनिया भर की जांच एजेंसियों के आंकड़ों को देखते हुए सीबीआई समेत देश की सभी जांच एजंसियों को अपना जांच के तरिकों में बहुत बड़े बदलाव की जरूरत है.

आईसीआईसीआई (ICICI) बैंक की तरफ से वीडियोकॉन कंपनी को दिए गए 3,250 करोड़ रुपये के लोन से जुड़े मामले में बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने वाले सीबीआई अफसर सुधांशु धर मिश्रा का तबादला कर दिया गया है.

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धर ने कथित भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के इस मामले में चंदा कोचर के अलावा उनके पति दीपक कोचर और वीडियोकॉन ग्रुप के मालिक वीएन धूत और अन्य के खिलाफ एफआईआर पर 22 जनवरी को हस्ताक्षर किए थे, जिसके अगले दिन उनका ट्रांसफर कर दिया गया. बैंकिंग सिक्योरिटी एंड फ्रॉड सेल (बीएसएफसी) में एसपी सुधांशु धर को अब रांची में सीबाआई की आर्थिक अपराध शाखा में भेज दिया गया है. उनकी जगह विश्वजीत दास को यह जिम्मेदारी दी गई है. इससे पहले दास कोलकाता में सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा में एसपी थे.

ANI

@ANI
Sudhanshu Dhar Mishra, who was SP of Banking&Securities Fraud Cell of CBI, Delhi has been transferred to CBI’s Economic Offences Branch in Ranchi, Jharkhand. He had signed FIR against Chanda Kochhar, Deepak Kochhar, VN Dhoot&others on Jan 22 in connection with ICICI-Videocon case

दरअसल सीबीआई का आरोप है कि चंदा कोचर ने आपराधिक साजिश के तहत एक प्राइवेट कंपनी का लोन मंजूर किया, जबकि अन्य आरोपियों पर आईसीआईसीआई बैंक से धोखाधड़ी करने का आरोप है. इस मामले में CBI ने गुरुवार सुबह वीडियोकॉन, न्यूपॉवर के ऑफिसेज़ में छापेमारी भी की है. छापेमारी मुंबई और औरंगाबाद समेत 4 जगहों पर हुई है.

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चंदा कोचर मामले में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कुछ दिनों पहले सीबीआई को निशाने पर लिया था. अमेरिका में इलाज करा रहे जेटली ने ट्वीट किया कि भारत में दोषियों को सजा मिलने की बेहद खराब दर का एक कारण जांच और पेशेवर रवैये पर दुस्साहस एवं प्रशंसा पाने की आदत का हावी हो जाना है.

जेटली ने कहा, ‘पेशेवर जांच और जांच के दुस्साहस में आधारभूत अंतर है. हजारों किलोमीटर दूर बैठा मैं जब आईसीआईसीआई मामले में संभावित लक्ष्यों की सूची पढ़ता हूं तो एक ही बात दिमाग में आती है कि लक्ष्य पर ध्यान देने के बजाय अंतहीन यात्रा का रास्ता क्यों चुना जा रहा है? यदि हम बैंकिंग उद्योग से हर किसी को बिना सबूत के जांच में शामिल करने लगेंगे तो हम इससे क्या हासिल करने वाले हैं या वास्तव में नुकसान उठा रहे हैं.’

क्या है पूरा मामला- चंदा कोचर पर मार्च 2018 में अपने पति को आर्थिक फ़ायदा पहुंचाने के लिए अपने पद के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया था. मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि आईसीआईसीआई बैंक ने वीडियोकोन समूह को 3,250 करोड़ रुपये का लोन मुहैया कराया था.

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वीडियोकॉन ग्रुप की पांच कंपनियों को आईसीआईसीआई बैंक ने अप्रैल 2012 में 3250 करोड़ रुपये का लोन दिया. ग्रुप ने इस लोन में से 86% यानी 2810 करोड़ रुपये नहीं चुकाए. 2017 में इस लोन को एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग असेट्स) में डाल दिया गया.मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वीडियोकॉन समूह के चेयरमैन वेणुगोपाल धूत के कोचर के पति दीपक कोचर के साथ व्यापारिक संबंध थे.

वीडियोकॉन ग्रुप की मदद से बनी एक कंपनी बाद में चंदा कोचर के पति दीपक कोचर की अगुवाई वाली पिनैकल एनर्जी ट्रस्ट के नाम कर दी गई. यह आरोप लगाया गया कि धूत ने दीपक कोचर की सह स्वामित्व वाली इसी कंपनी के ज़रिए लोन का एक बड़ा हिस्सा स्थानांतरित किया था. आरोप है कि 94.99 फ़ीसदी होल्डिंग वाले ये शेयर्स महज 9 लाख रुपये में ट्रांसफ़र कर दिए गए.

आपको बता दें कि पिछले साल अक्टूबर में वीडियोकॉन समूह को लोन दिए जाने के मामले में आरोपों का सामना कर रही चंदा कोचर ने आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ, प्रबंध निदेशक और बैंक के सब्सिडिअरी के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर के पद को छोड़ दिया था.

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