पूर्व मंत्री मंजू वर्मा के यहां हथियार मिलने की होगी जांच

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MINISTER MANJU VERMA KA RESIGNING KE BAD PRESS CONFRENCE

मुजफ्फरपुर आश्रय गृह यौन शोषण कांड की जांच से परतें खुलती जा रही हैं। सीबीआई की जांच में कुछ ऐसे तय सामने आए हैं जिनसे बिहार सरकार की साख पर आंच आ सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की प्रगति रिपोर्ट पर संज्ञान लिया और पूर्व मंत्री मंजू वर्मा और उसके पति चंद्रशेखर वर्मा से असलहे का जखीरा बरामद होने की जांच बिहार पुलिस को सौंप दी।जस्टिस मदन लोकुर और दीपक गुप्ता की बेंच ने यौन शोषण कांड के मुख्य अभियुक्त ब्रजेश ठाकुर के खिलाफ आयकर जांच के भी आदेश दिए। अदालत ने कहा, ठाकुर के एनजीओ सेवा संकल्प एवं विकास समिति को दस साल में साढ़े चार करोड़ सरकार से हासिल हुए। उसने 35 गाड़ियां खरीदी। सीबीआई की रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ब्यूरो को एनजीओ तथा उसके संचालक की कथित बेहिसाब संपत्ति की जानकारी इनकम टैक्स विभाग के संबंधित चीफ कमिश्नर को दे ताकि आयकर जांच संभव हो सके। सुप्रीम कोर्ट ने मुजफ्फपुर आश्रय गृह यौन शोषण कांड की सुनवाई के दौरान बिहार पुलिस से कहा, भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद होने के मामले में पूर्व मंत्री मंजू वर्मा और उनके पति चंद्रशेखर वर्मा से पूछताछ की जाए। मुजफ्फरपुर आश्रय गृह यौन शोषण मामले के बीच मंजू वर्मा को समाज कल्याण मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। आश्रय गृह में कई महिलाओं से बलात्कार हुआ था। मामले की जांच प्रगति के बारे में सीबीआई की रिपोर्ट पढ़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया। रिपोर्ट में कहा गया कि चंद्रशेखर वर्मा और उनकी पत्नी के कब्जे में बड़ी मात्रा में गैरकानूनी हथियार थे। बेंच ने कहा, हम स्थानीय पुलिस से इस मामले पर गौर करने की उम्मीद करते हैं। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जांच सही दिशा में चल रही है। अदालत ने आयकर विभाग से उस गैरसरकारी संगठन तथा इसके मालिक ब्रजेश ठाकुर की संपत्तियों पर गौर करने को भी कहा जो आश्रय गृह संचालित करता है। अदालत ने राज्य सरकार को आश्रय गृह से आठ लड़कियों को स्थानान्तरित करने के मामले में एक हलफनामा दायर करने का भी निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, आश्रय गृह की लड़कियों को अन्यत्र स्थानांतरित करने की बात इस साल मार्च में सामने आई थी। इसका मतलब है कि बिहार के समाज कल्याण विभाग को आश्रय गृह में हो रही आपत्तिजनक गतिविधियों की जानकारी थी। समाज कल्याण विभाग के समस्त र्रिकड जब्त करके जांच की जाए। सीबीआई की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ठाकुर तथा अन्य अभियुक्तों के आतंक का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि लड़कियों के चीख आसपास के लोग सुनते थे कि लेकिन कोई भी शख्स शिकायत करने का साहस नहीं जुटा पाता था।सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को चार हफ्ते में मामले की जांच पर अगली प्रगति रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दायर करने का भी निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने 18 सितम्बर को मामले की जांच के लिए नई सीबीआई टीम गठित करने के पटना हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी। अदालत ने कहा था कि ऐसा करना न सिर्फ अब तक की जांच बल्कि पीड़ितों के लिए भी नुकसानदेह होगा। हाईकोर्ट ने 29 अगस्त को आदेश दिया था कि मामले में सीबीआई के विशेष निदेशक द्वारा जांच की नई टीम गठित की जाए। यह मामला बिहार के मुजफ्फरपुर में एक एनजीओ द्वारा संचालित आश्रय गृह में महिलाओं के कथित बलात्कार और यौन शोषण से जुड़ा है।

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