पाटलिपुत्र का इतिहास ताजा करने का होगा प्रयास : नीतीश

0
15

कौमुदी महोत्सव अगले वर्ष से शरद पूर्णिमा के दिन ही आयोजित किया जायेगा। शरद पूर्णिमा की रात चांद पृवी के अधिक निकट आने के साथ आयुव्रेद और धर्म दोनों के ख्याल से फायदेमंद होता है। यह बातें सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कही। वे रविवार को पटना सिटी स्कूल के खेल मैदान में आयोजित कौमुदी महोत्सव के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पटना घाट की जमीन रेलवे से लेने के बाद करीब पांच एकड़ जमीन बचेगी, इस जमीन पर पाटलिपुत्र का इतिहास ताजा करने का प्रयास किया जायेगा। उन्होंने कहा कि पटना सिटी पुराना पाटलिपुत्र है और दुनिया के बड़े हिस्से पर यहां से शासन किया गया है। उन्होंने कहा कि हमारी तो सोच थी कि सरकार का ऐसा कोई ऑफिस बने जहां आकर खुद काम कर सकूं। लेकिन जगह कम है, यहां आवादी घनी है। इसलिए यह संभव नहीं है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पथ निर्माण मंत्री सह स्थानीय विधायक नंदकिशोर यादव ने कहा कि पटना सिटी पहले उपेक्षा का शिकार था। 2005 में एनडीए सरकार में पटना सिटी की भागीदारी के बाद से लगातार यहां का विकास होता गया। सिखों का पटना साहिब महोत्सव 2008 में आरंभ हुआ। इसके बाद कौमुदी महोत्सव आरंभ हुआ है। विकास के अनेक कार्य चल रहे हैं। कला संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री कृष्ण कुमार ऋषि ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने रासलीला की थी। बिहार के हर क्षेत्र में सामाजिक बुराई दूर करने का काम सीएम नीतीश कुमार ने किया है। महिला, वृद्ध, युवा में जागरुकता आ रही है। कौमुदी महोत्सव का संदेश पूरे देश में जायेगा। 

मुख्यमंत्री ने प्राचीन पाटलिपुत्र की महत्ता पर प्रकाश डालते कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा नगर था पाटलिपुत्र। भारत के बड़े क्षेत्र में पाटलिपुत्र से ही शासन होता था। आज पाटलिपुत्र का वह स्वरूप नहीं है। प्रेम-भाईचारे से हम सब फिर से उस गौरव को प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि गौरव की बात है कि सिख की कम आबादी होने के बावजूद पटना साहिब में सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गो¨वद सिंह की जन्मस्थली है। दशमेश गुरु सात वर्षों तक यही रहे। यहां दशमेश गुरु का 350 वां यादगार प्रकाशोत्सव व शुकराना समारोह मनाया गया। राजधानीवासियों ने अतिथियों का स्वागत भव्य तरीके से किया। जिसे आज भी लोग याद करते हैं।

यह भी पढ़े  कांग्रेस की चुनाव संचालन समिति में अशोक चौधरी, स्‍टार प्रचारक में नहीं मिली जगह

उन्होंने कहा कि अगले वर्ष तक ऐतिहासिक स्थल गुरु का बाग में प्रकाश पुंज बनकर तैयार हो जाएगा। पटना घाट स्थित पुरानी रेल लाइन की जगह सड़क बनेगी। उसे आवागमन की सुविधा के लिए फोरलेन सड़क के माध्यम से गंगा पथ से जोड़ा जाएगा। पटना घाट में सड़क किनारे पांच एकड़ जमीन पर राजधानी का महत्वपूर्ण कार्य की योजना है ताकि यह महसूस हो सके कि यह पाटलिपुत्र, राजधानी का प्रमुख इलाका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बिहार देश का सभ्यता द्वार है। सम्राट अशोक युद्ध जीतने के बाद अपने अंदर एक दूसरे भाव को धारण कर बुद्ध के प्रति खुद को समर्पित कर दिया। वे चंडाशोक से धम्माशोक बने। अंत में शांति ही सबसे बड़ी चीज होती है और कौमुदी महोत्सव उसी शिक्षा को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ेगा। कहा जाता है कि इसी इलाके में सम्राट अशोक प्रतिवर्ष एक आयोजन करते थे जिसमें लगभग एक करोड़ लोग भाग लेते थे। हमलोगों ने सम्राट अशोक कन्वेंशन केंद्र बनवाया। जिसमें चंडशोक से धम्मशोक के रूप में अशोक की सांकेतिक मूर्ति लगी है। यहां सभ्यता द्वार भी बनाया गया है। यह ज्ञान भूमि है। यहां शिक्षा के केंद्र के रूप में नालंदा व विक्रमशीला जैसे विश्वविद्यालय रहे हैं। इतिहास याद कर अतीत से प्रेरणा लेकर शिक्षा, समन्वय, शांति व अ¨हसा पर ध्यान दें। इससे पहले मुख्यमंत्री ने राधा-कृष्ण की तस्वीर पर पुष्प अर्पित किए।

यह भी पढ़े  बिहार कैबिनेट की बैठक में 4 एजेंडों पर लगी मुहर

इस दौरान सीएम व अन्य अतिथियों को अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री समेत अन्य विशिष्ट ने पाटलिपुत्र स्मारिका का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धि के लिए प्रेम किरण, रामनरेश चौरसिया, संजय रॉय, डॉ. पीके अग्रवाल, कृष्ण कुमार अग्रवाल, प्रमोद कुमार यादव को सम्मानित किया। विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर काम करने वाले सात लोगों को सम्मानित किया गया। धन्यवाद ज्ञापन जिलाधिकारी कुमार रवि ने किया। मौके पर मेयर सीता साहू,पाटलिपुत्र परिषद के संजीव यादव, कला एवं संस्कृति विभाग के प्रधान सचिव रवि परमार, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष वर्मा सक्रिय थे। 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here