पांच और मेडिकल कॉलेज बिहार में खुलेंगे : चौबे

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पटना। केन्द्रीय स्वास्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने कहा कि बिहार में स्वास्य सेवाओं को बढ़ाने के प्रति तत्पर केन्द्र सरकार दूसरे फेज में पांच और कॉलेज खोलने जा रही है। ये कॉलेज बक्सर, झंझारपुर,सीतामढ़ी, सीवान और जमुई में खुलने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए केन्द्र सरकार ने 250 करोड़ का बजट भी रखा है। राज्य सरकार के सहयोग से ये कॉलेज खोले जाएंगे। राज्य सरकार 20 एकड़ जमीन देगी। इसके पहले बिहार में तीन और मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की थी जहां निर्माण कार्य चल रहा है। इनमें छपरा मेडिकल कॉलेज को 3 करोड़ रुपया दिया भी गया है। पूर्णिया में काम चल रहा है। समस्तीपुर में जमीन नहीं मिलने के कारण काम शुरू नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे तो देश में 73 सुपर स्पेशीयलिटी अस्पताल खोले जा रहे हैं मगर बिहार में छह सुपर स्पेशीयलिटी अस्पताल की स्वीकृति दी गई है। भागलपुर व गया में काम शुरू है। दरभंगा व मुजफ्फरपुर काम प्रारम्भ होने को है। पटना में जमीन नहीं मिलने के कारण कार्य प्रारम्भ नहीं हो सके। उन्होंने आयुष्मान भारत की र्चचा करते कहा कि 23 राज्यों की स्वीकृति मिल चुकी है। अन्य राज्य भी देने में लगे हैं। बिहार ने भी एमओयू पर हस्ताक्षर कर दिये हैं। इलनेस को वेलनेस अस्पताल बदलने के टारगेट में 1.5 लाख सब अस्पतालों को चिन्हित किया गया है। इस साल 14 हजार सब अस्पतालों का लक्ष्य रखा गया है। 2022 तक 1.5 लाख पूरा करना है। बिहार में दूसरा एम्स खोले जाने की प्रक्रिया शुरू है। 200 एकड़ जमीन मिलते ही कार्य प्रारम्भ हो जाएगा। 
 केन्द्रीय स्वास्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि दुनिया के किसी भी छात्र आंदोलन से निकलने वाले छात्र नेताओं में लालू प्रसाद सबसे भ्रष्टाचारी नेता साबित हुए। और यही वजह है कि कई मामलों में दोषी लालू प्रसाद को सजा भी सुनाई गई और भ्रष्टाचार के आरोप में जेल भी गये। केन्द्रीय स्वास्य राज्य मंत्री श्री चौबे ने आज ये बातें आपातकाल के 43वें साल पूरे होने पर संपूर्ण क्रांति आन्दोलन के र्चचा के दौरान की। राजकीय अतिथिशाला में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते श्री चौबे ने कहा कि यह लालू प्रसाद ही हैं जिन्होंने आपातकाल के दौरान अपनी मृत्यू की झूठी र्चचा करा कर पूरे आन्दोलन को भ्रमित करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि दूसरी ओर वामदल के नेता थे जिन्होंने 18 मार्च 1974 को छात्र आन्दोलन को हिंसात्मक की ओर मोड़ कर पूरे छात्र आन्दोलन को भरमाने की कोशिश की। उन्होंने आन्दोलन की र्चचा करते कहा कि पहले लोकनायक इस आन्दोलन के लिए तैयार नहीं थे। लेकिन बाद में जब उन्हें यह विास दिलाया गया कि वे लोग विद्यार्थी परिषद के संयमित और अनुशासित लोग हैं तो वे इस आन्दोलन के लिए तैयार हुए। आन्दोलन के क्रम में कांग्रेसी सत्ता ने जब दमनकारी नीति अपनाई तो हम सब पुलिस की लाठिया खा रहे थे और लालू प्रसाद वहां से भाग खड़े हुए। उन्होंने इस मौके पर खास कर छात्र आन्दोलन से निकले उन नेताओं पर सवाल खड़े किये जिन्होंने अपनी नीतियों का त्याग कर सिर्फ सत्ता के लिए कांग्रेस की गोद में खेलना जरूरी समझा। उन्होंने वैसे नेताओं से सीधा सवाल पूछा कि क्या कांग्रेसी सत्ता द्वारा आपातकाल लगाना सही था? मीडिया पर वैिक कसना सही था? भ्रष्टाचार की झड़ी लगाना सही था ? सारे विपक्ष को जेल में डालने वाली कांग्रेसी सत्ता सही थी ? उन्होंने कहा कि आज वही कांग्रेस लोकतंत्र खतरे में है, का रट लगा रही है। कांग्रेस के नेताओं के मुंह से ऐसा कहना लोकतंत्र को भी शर्मसार करना है। किसी भी कांग्रेस नेता को ऐसा कहने का नैतिक आधार नहीं है। दरअसल सत्ता से बाहर रही कांग्रेस ऐसा कह कर भ्रम फैलाना चाहती है। 

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