पहले बैंकर फिर पत्रकार और अब राज्यसभा के उप सभापति, कुछ ऐसी है हरिवंश की कहानी

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जनता दल (यूनाइटेड) के सांसद हरिवंश नारायण सिंह राज्‍यसभा के उप-सभापति बन गए हैं. राज्यसभा के उपसभापति का चुनाव गुरुवार को हुआ. इसमें एनडीए के उम्मीदवार पूर्व पत्रकार और झारखंड व बिहार के प्रमुख अखबार ‘प्रभात खबर’ के एडिटर रहे हरिवंश नारायण सिंह को जीत मिली.

हरिवंश को 125 वोट मिले वहीं कांग्रेस की ओर से पार्टी के पूर्व महासचिव बीके हरिप्रसाद उम्मीदवार थे जिन्हें 105 वोट मिले हैं. हरिवंश नारायण सिंह का जन्म यूपी के बलिया के सिताब दियारा में एक राजपूत परिवार में हुआ है. उन्होंने राज्यसभा के उप सभापति की कुर्सी पर बैठने से पहले बैंकर और संपादक के तौर पर भी काम किया है. बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा हासिल करने वाले हरिवंश ने शुरुआती दिनों में बैंक में हिन्दी अधिकारी के रूप में काम किया

कौन हैं हरिवंश…

हरिवंश का पूरा नाम हरिवंश नारायण सिंह है.

यूपी के बलिया में हुआ हरिवंश का जन्म – 30 जून 1956

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सिताब दियारा के राजपूत परिवार से है ताल्लुक

बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा हासिल की

शुरुआती दिनों में बैंक में हिन्दी अधिकारी के रुप में किया काम

रविवार मैगजीन से की पत्रकारिता की शुरुआत

1989 में प्रभात खबर अखबार से जुड़े

काफी समय तक रहे प्रभात खबर के प्रधान संपादक

‘मैंने दुनिया देखी’ नाम की किताब भी लिख चुके हैं हरिवंश

पत्रकारिता से राजनीति में आए हरिवंश

2014 में जेडीयू कोटे से राज्यसभा सांसद बने

राज्यसभा सांसद हरिवंश नीतीश कुमार के हैं बेहद करीबी

जेपी और चंद्रशेखर के भी रहे हैं बेहद करीब​

हरिवंश से जुड़ी अहम बातें:

1. हरिवंश का जन्‍म 1956 में बलिया के मध्‍यमवर्गीय परिवार में हुआ. बीएचयू से इकोनॉमिक्‍स में एमए और पत्रकारिता में डिप्‍लोमा किया.

2. कॉलेज के दिनों में वह समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण (जेपी) से प्रभावित हुए. 1974 में जेपी आंदोलन में सक्रिय हिस्‍सा लिया.

3. 40 साल की लंबी पत्रकारिता की शुरुआत 1977 में टाइम्‍स ऑफ इंडिया के ट्रेनी जर्नलिस्‍ट के रूप में शुरू की थी. उसके बाद मुंबई में धर्मयुग पत्रिका से जुड़े और 1981 तक वहां काम किया. हरिवंश ने एक इंटरव्‍यू में कहा था कि उन्‍होंने 500 रुपये में अपनी पहली नौकरी शुरू की थी.

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4. 1981-84 के दौरान इन्‍होंने बैंक ऑफ इंडिया में काम किया. उसके बाद अमृत बाजार पत्रिका की मैगजीन रविवार में असिस्‍टेंट एडीटर बने. 1989 में उन्‍होंने उषा मार्टिन समूह के संघर्षरत अखबार प्रभात खबर की रांची में कमान संभाली. जब वह प्रभात खबर पहुंचे तो उस वक्‍त इस अखबार का सर्कुलेशन महज 400 कॉपी ही था. 25 वर्षों तक इस अखबार के संपादक का दायित्‍व निभाने वाले हरिवंश के नेतृत्‍व में ही यह अखबार झारखंड का सर्कुलेशन के लिहाज से नंबर वन अखबार बना. इन्‍होंने झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल में प्रभात खबर के कई संस्‍करणों को लांच किया.

5. 1990 में जब चंद्रशेखर प्रधानमंत्री बने तो वह उनके एडीशनल मीडिया एडवाइजर बने. 25 वर्षों तक प्रभात खबर की कमान संभालने के बाद 2014 में राज्‍यसभा के लिए चुने गए. नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने उनको राज्‍यसभा भेजा. रोचक बात यह है कि जब उनको राज्‍य सभा भेजा गया तो वह जदयू के प्राथमिक सदस्‍य भी नहीं थे.

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जब राज्‍यसभा के लिए हुआ निर्विरोध निर्वाचन
राज्‍यसभा में अपने निर्विरोध निर्वाचन के अनुभव के बारे में हरिवंश ने लिखा था कि वह बिना एक रुपया खर्च किए हुए राज्‍यसभा पहुंच गए. उन्‍होंने‍ लिखा कि उन्‍होंने राज्‍यसभा के लिए नामांकन फॉर्म 10 हजार रुपये में खरीदा था. लेकिन निर्विरोध चुने जाने के कारण वह राशि उनको लौटा दी गई. लिहाजा राज्‍यसभा तक पहुंचने में उनका एक भी पैसा खर्च नहीं हुआ.

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