पशु चिकित्सकों पर सरकार मेहरबान,एमबीबीएस डॉक्टरों के बराबर मिलेगा वेतन

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राज्य सरकार जल्द ही पशु चिकित्सकों को तोहफा देगी। पशु चिकित्सकों को एमबीबीएस चिकित्सकों के बराबर वेतन दिया जायेगा। इस संबंध में राज्य सरकार जल्द ही फैसला लेगी। यह घोषणा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को पांच वर्षीय ‘‘बिहार लाइव स्टॉक मास्टर प्लान‘‘ पुस्तिका का विमोचन एवं पशु मत्स्य संसाधन विभाग की विभिन्न जनोन्मुखी योजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास करने के मौके पर की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोगों ने पशु विज्ञान विविद्यालय बनाया है और अब ऐसे हॉस्पिटल भी डेवलप होने चाहिए, जहां आउटडोर ट्रीटमेंट के साथ-साथ इनडोर ट्रीटमेंट की सुविधा हो। इस दिशा में पूरी मजबूती और गंभीरता के साथ अधिकारियों को ध्यान देने की जरूरत है। इसके अलावा एनिमल हसबैंडरी के जो हॉस्पिटल्स हैं, वहां भी धीरे-धीरे यह व्यवस्था लागू होगी। उन्होंने कहा कि एनिमल हसबैंडरी की पढ़ाई करनेवाले छात्र बीच में ही पढ़ाई छोड़कर अन्य क्षेत्रों में चले जा रहे थे, जिसको देखते हुए ऐसे छात्रों को प्रेरित करने के लिए हमलोगों ने स्कॉलरशिप देना शुरू किया। बहुत जल्द ही हमलोग मेडिकल चिकित्सकों की तरह पशु चिकित्सकों को भी सैलरी देने का फैसला लेनेवाले हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सरकार के कृषि विज्ञान की तर्ज पर ही हम चाहते हैं कि बिहार में पशु विज्ञान केंद्र स्थापित हो। इसके लिए जो धनराशि की आवश्यकता होगी, उसे राज्य सरकार मुहैया करायेगी। बिहार में इस क्षेत्र में काफी गुंजाइश है। उन्होंने कहा कि मिलावट का दौर चल रहा है। ऐसे में सहज तरीके से साधारण जांच के जरिये लोग कैसे दूध की शुद्धता की जांच कर सके इससे लोगों को अवगत कराने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सुधा का भी ज्यादा विस्तार करना है, लेकिन क्वालिटी से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिहार लाइव स्टॉक मास्टर प्लान बनाया गया है यह अच्छी बात है। इससे कृषि रोडमैप का लक्ष्य हासिल करने में सहूलियत होगी। सीएम ने कहा कि वर्ष 2008 में चार वर्षीय पहला कृषि रोडमैप बना था, उसका काफी प्रभाव देखने को मिला। इसके बाद वर्ष 2012 में दूसरा कृषि रोडमैप (2012-17) लागू किया गया। दूसरे कृषि रोडमैप में हर जरूरत को ध्यान में रखते हुए उसका विस्तृत स्वरूप तैयार किया गया जिसमें कृषि, मत्स्य, राजस्व, सिंचाई जैसे 18 विभागों को शामिल किया गया, जिसकी अच्छी उपलब्धि रही है और अब तीसरे कृषि रोडमैप (2017-22) पर काम आगे बढ़ रहा है।उन्होंने कहा कि हमारा मकसद है कि किसानों की आमदनी बढ़े। उन्होंने कहा कि किसान सिर्फ वह नहीं जिनके अपने खेत हैं, बल्कि किसान वे सभी लोग हैं, जो कृषि के क्षेत्र में कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में महिलाओं का स्वयं सहायता समूह जो पहले से चल रहा था, वह काफी कम था, लेकिन अब उसकी संख्या बढ़कर सवा आठ लाख हो गयी है, जिससे 96 लाख परिवार जुड़े हुए हैं। ऐसे में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से मुर्गीपालन किया जाये, तो वह काफी प्रभावी साबित होगा। उन्होंने कहा कि मुर्गीपालन और बकरीपालन को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से करियेगा तो इसका काफी विस्तार होगा और गांव-गांव तक इसका फायदा पहुंचेगा। कृषि क्षेत्र में अनाज उत्पादन के अलावा, दूध, मछली, अंडा, मांस, फल, सब्जी आदि चीजें भी शामिल हैं और जीएसडीपी में कृषि का जो योगदान है, उसमें एक-तिहाई से भी ज्यादा भूमिका पशु एवं मत्स्य संसाधन क्षेत्र की है, क्योंकि बिहार बाढ़ एवं आपदा प्रभावित राज्य है। ऐसे में पशुधन के माध्यम से ही लोग स्थायी रूप से अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं।

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