पशुधन उत्पाद संबंधी जरूरतों की पूर्ति को बना नया मास्टर प्लान

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बिहार सरकार ने पशुधन संबंधी धन संबंधी आवश्यकताओं और इसके राष्ट्रीय लक्ष्य को देखते हुए 15 साल का पशु प्रक्षेत्र विश्लेषण करने के उपरांत पांच वर्षीय लाइव स्टक मास्टर प्लान तैयार किया है। अंतरराष्ट्रीय पशुधन अनुसंधान संस्थान, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग की टीम और पशुधन प्रक्षेत्र से संबंधित विशेषज्ञों का तैयार किया गया है। इस मास्टर प्लान का उद्देश्य पशु उत्पाद से संबंधित भविष्य की आवश्यकताओं की पूर्ति करना है। साथ ही गरीबी घटाना और आर्थिक विकास ग्रामीण लोगों के खाद्य एवं पोषण की सुरक्षा में सुधार, व्यापारिक क्षमता बढ़ाना, औद्योगिककरण और रोजगार सृजन में योगदान एवं सामाजिक समरूपता लाना है। इसके लिए कम्फेड की, पशुपालन प्रक्षेत्र की और मत्स्य प्रक्षेत्र की कई योजनाएं चलायी जानी हैं।राज्य के सहकारी तंत्र के अंतर्गत महेशखूंट, खगड़िया में एक 300 टन दैनिक क्षमता के पशु आहार संयंत्र का 36.23 करोड़ की लागत से निर्माण किया जाना है। भागलपुर जिला स्थित 60 हजार लीटर दैनिक क्षमता की डेयरी की क्षमता को 2 लाख लीटर दैनिक क्षमता में उन्नयित किया जाएगा। राज्य के सभी जिलों में कुल 3027 स्वचालित डाटा प्रोसेसर आधारित दुग्ध संग्रहण इकाईयों की स्थापना की गई है, इससे दुग्ध समितियों में उत्पादकों के आपूत्तर्ित दूध के वजन और फैट, वसा रहित ठोस स्वचालित ढंग से हो सकेगी। राज्य के गांवों में दुग्ध समितियों के उत्पादकों से प्राप्त दूध को ठंडा कर उसकी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए 1000 लीटर दैनिक क्षमता के 20 और 500 क्षमता के 10 बल्क मिल्क कूलरों की स्थापना की गई है। राज्य के दुधारू पशुओं को पशु पालकों के दरवाजे पर ही कृत्रिम गर्भाधान सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नेशनल प्रोग्राम फर बोभाईन ब्रीडिंग के तहत 725 मैत्री केंद्रों की स्थापना की गई है। कॉम्फेड उत्पादित दूध के पावडर को छोटे पैक में उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराने के लिए बिहारशरीफ स्थित नालंदा डेयरी में मशीनों की स्थापना की गई है। कम्फेड की बिहारशरीफ डेयरी संयंत्र ने दूध के अतिरिक्त एप्पल ड्रिंक को टेट्रापैक में उपलब्ध कराने की क्षमता प्राप्त कर ली है। डेयरी संयंत्रों के दूध को तत्काल एक डिग्री तक ठंडा कर देने से उसकी गुणवत्ता को लंबी अवधि तक संरक्षित रखा जा सकता है, जो लंबी दूरी तक परिवहन में सहायक साबित होता है। इसके तीन इकाईयों की स्थापना नेशनल मिशन फॉर प्रोटीन सप्लिमेंट के तहत की गई है। दूध की गुणवत्ता को तीव्रतम गति से अत्याधुनिक तरीके से जांच करने के लिए स्वचालित मिल्को स्कैनर की आठ इकाइयों की स्थापना की गई है। इससे दूध के घनत्व, फैट, प्रोटीन, वसा रहित ठोस, लैक्टोज, केसिन, कुल ठोस, कुल एसीडिटी, साइट्रिक एसिड, फ्रीड फैटी एसिड तथा यूरिया इत्यादि की जांच की जाती है। सहरसा, मधेपुरा और पटना जिलों में राष्ट्रीय षि विकास योजनान्तर्गत चार प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय का उद्घाटन हाल ही में किया गया है। राज्य के 17 जिलों पटना, बक्सर, कैमूर, गया, औरंगाबाद, अरवल, भागलपुर, मुंगेर, जमुई, सहरसा, पूर्णिया, किशनगंज, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, सीवान, पश्चिम चंपारण और दरभंगा में प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालयों का शिलान्यास भी किया गया। इससे पशु चिकत्सालय, औषधालयों की स्थापना और सुदृढ़ीकरण की योजना को बल मिलेगा। समेकित बकरी विकास योजना एवं लेयर मुर्गी फार्म को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य के विभिन्न जिलों में 13 नवनिर्मित मत्स्य बीज हेचरी का उद्घाटन किया गया है। पटना जिले के मसौढ़ी और बख्तियारपुर में फिश फीड मिल का उद्घाटन किया गया है। दो सालों में समग्र गव्य विकास योजनानंतर्गत राज्य के समान वर्ग के लाभुकों को 50 प्रतिशत अनुदान पर 3916 डेयरी इकाई तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लाभुकों को 66.66 प्रतिशत अनुदान पर क्रमश: 1272 डेयरी इकाई एवं 376 डेयरी इकाई की स्थापना कर अनुदान वितरित किया गया है। पशुपालन से अब सिर्फ दूध का ही संबंध नहीं है बल्कि गाय के गोबर और गोमूत्र से बने जैविक खाद, वर्मी कंपोस्ट, वायो पेस्टिसाइट्स जैसे बायो फर्टिलाइजर का निर्माण कर जैविक खेती में इसका उपयोग किया जा रहा है। किसानों को दूध से होने वाली आमदनी के अलावा गोबर और गोमूत्र से भी अच्छी आमदनी की गुंजाइश होगी।

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