पप्पू यादव ने गुजरात रेप पीड़िता के परिजनों को एक लाख रुपए की सहायता की, उठाए ये पांच सवाल

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जन अधिकार पार्टी के नेता और सांसद पप्पू यादव ने गुजरात जाकर वहां रेप की शिकार हुई 14 महीने की बच्ची के परिजनों से मुलाकात की. उन्होंने परिवार को बिहार की तरफ से एक लाख रुपए की मदद दी लेकिन रेप की घटना के बाद बिहार और यूपी के लोगों पर हुई हमलों के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार को जिम्मेदार ठहराया और रेप की घटना की जांच पर भी सवाल उठाए.

पप्पू यादव ने कहा कि रेप की घटना के इतने दिनों बाद तक मेडिकल रिपोर्ट क्यों नहीं सार्वजनिक हुई? उन्होंने कहा, “इस घटना में जो आरोपी है वो बिहार का है. उसका पीड़ित के घर आना-जाना कई साल से था. इसकी भी जांच होनी चाहिए कि क्या आरोप के पीछे कोई निजी दुश्मनी या कोई और वजह तो नहीं है. लेकिन दूध का दूध और पानी का पानी हो. अगर वो दोषी है तो उसे फांसी दीजिए लेकिन इस घटना की आड़ में बिहारियों पर हमले का जवाब कौन देगा?”

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पप्पू यादव ने बिहारियों पर हमले में अल्पेश ठाकोर को क्लीन चिट देते हुए पांच सवाल उठाए

घटना के बाद तीन दिनों तक आरोपी का वीडियो और हिंसा का वीडियो वायरल होता रहा. कोई भी तनाव होने पर यहां की सरकार पहले इंटरनेट बंद करती है, इस मामले में ऐसा क्यों नहीं हुआ?

2. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और खास कर गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी इस मामले पर चुप क्यों रहे?

3. पुलिस ने तत्परता से काम क्यों नहीं किया, आधार कार्ड देख कर मारपीट घटना कैसे हुई और बच्ची की मेडिकल रिपोर्ट कहां है?

4. अल्पेश ठाकोर को बिहार का सह प्रभारी होने के कारण निशाना बनाया गया. अगर उनकी या ठाकोर सेना की भूमिका थी तो ठाकोर के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

5. गुजरात से हुए अभूतपूर्व पलायन को रोकने की कोशिश क्यों नहीं की गई? खबरों के मुताबिक गुजरात के एक मंत्री घटना से तीन दिन पहले डोमिसाइल के आधार पर स्थानीय लोगों को तरजीह देने की बात कही थी, इसकी जांच हो.

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सांसद ने साबरकंठा जिले के हिम्मतनगर अंतर्गत डाबूई गांव के पास ताड़पतरा में पीड़ित बच्ची के परिजनों से मिलने के बाद कहा कि गुजरात के हर सुख-दुख में बिहारी उनके साथ खड़े होते हैं. लेकिन, गुजराती इस दर्द को भी भूल गये. दुष्‍कर्मी को फांसी दे देनी चाहिए. लेकिन, उसके कुकर्मों की सजा सभी बिहारियों को देना उचित नहीं है. उन्‍होंने कहा कि जहां दुष्‍कर्म पीड़ित बच्‍ची को न्‍याय दिलाने की बात होनी चाहिए थी, वहीं आज इस पर क्षेत्रवाद की राजनीति हो रही है. इससे बच्‍ची को न्‍याय दिलाने की बात दब गयी है. मेरा मानना है कि दुष्‍कर्म करनेवालों को सरेआम फांसी दी जानी चाहिए. ताकि, ऐसे लोग अगली बार बेटियों को नजर उठाकर भी देखने का हिम्‍मत न करें. उन्‍होंने बच्‍ची के परिजनों को डेढ़ लाख रुपये की आर्थिक मदद भी की.

सांसद ने कहा कि 14 महीने की बच्‍ची के बलात्कार के बाद दो लाख से अधिक प्रवासियों को गुजरात छोड़ने पर मजबूर हुए. आजादी के बाद पहली बार ऐसा हुआ है, जब इतने बड़े पैमाने पर लोगों को डर से भागने को मजबूर होना पड़ा है. गुजरात में देश के संघीय ढांचे पर हमला हुआ है. देश में भर में किसी न किसी बहाने बिहारियों पर हमले हो रहे हैं. यह खतरनाक प्रृवृत्ति है. इस पर राजनीति करना ठीक नहीं है. उन्‍होंने कहा कि कानून से बड़ा कोई नहीं है. संविधान से बड़ा कोई नहीं है. बिहारियों के साथ हुए दुर्व्‍यवहार के लिए गुजरात सरकार को क्षमा मांगनी चाहिए और पीएम मोदी इस पर चुप क्‍यों हैं? यह समझ से परे है.
उन्‍होंने गुजरात के मुख्‍यमंत्री की इस्‍तीफे की मांग करते हुए कहा कि गुजरात के मुख्‍यमंत्री ने तीन दिनों तक बिहारियों के खिलाफ स्‍थानीय लोगों को मारपीट और दुर्व्‍यवहार करने की छूट दे दी थी. बिहारियों को सुरक्षा देने में विफल मुख्‍यमंत्री को इस्‍तीफा दे देना चाहिए.

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