पपीते की खेती पर 50 प्रतिशत अनुदान : प्रेम

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पटना : राज्य के कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि राज्य में पपीते की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देने हेतु किसानों को सहायतानुदान दिया जायेगा। पपीते की सघन खेती पर लागत मूल्य का 50 प्रतिशत यानी अधिकतम 30,000 रुपये प्रति हेक्टर सहायतानुदान दिया जाएगा।

यह अनुदान दो किस्तों में 75:25 के अनुपात में दिया जाएगा। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2017-18 में 375 हेक्टेयर (इकाई लागत 60,000 रुपये प्रति हेक्टेयर) लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अनुदान पाने के लिए इच्छुक किसान अपने जिले के सहायक निदेशक उद्यान के कार्यालय से सम्पर्क कर इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।डॉ. कुमार ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा कृषकों को आमदनी बढ़ाने हेतु मुख्यमंत्री बागवानी मिशन योजना के तहत पपीते के क्षेत्र विस्तार कार्यक्रम को शामिल किया गया है। प्रति हेक्टेयर क्षेत्र में 3,086 पपीते के पौधे लगाये जाते हैं। बिहार में मुख्य रूप से समस्तीपुर,बेगूसराय, मुंगेर, वैशाली एवं भागलपुर जिला में पपीता की खेती की व्यावसायिक स्तर पर की जाती है।

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पपीता की सफल बागवानी हेतु गहरी और उपजाऊ, सामान्य पी.एच.मान वाली बलुई दोमट मिट्टी अत्यधिक उपयुक्त मानी जाती है। पपीता में औषधीय गुण, विटामिन ए, विटामिन ई एवं खनिज लवण प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, साथ ही कच्चे फल से पेठा, बर्फी, खीर, रायता एवं पक्के फल से जैम, जेली, नेक्टर तथा कैण्डी आदि बनाया जाते हैं।

पपीता में एक विशिष्ट प्रकार का एन्जाइम (पपेन) होता है, जो औषधीय रूप से काफी महत्वपूर्ण है। यह पेट के लिए काफी लाभकारी होता है। जिसके कारण पपीता उत्पादक किसान को आमदनी का मुख्य स्रेत है। पपीता का मुख्य अनुशंसित प्रभेदों में पूसा डेलिसियस, पूसा मनेस्टी, पूसा ड्वार्फ, पूसा जायन्ट, पूसा नन्हा, रांची ड्वार्फ, रेड लेडी प्रमुख है।

इन किस्मों में रेड लेडी से पपीता की खेती करना कृषकों के लिए श्रेयष्कर है, क्योंकि इस किस्म के सभी पपीता पौधों पर फलन होता है एवं अन्य किस्मों की अपेक्षा ज्यादा उत्पादन होता है।

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