पति के इलाज के लिये गिड़गिड़ाती रही पत्नी लेकिन बंद समर्थकों ने नहीं दिया रास्ता, अस्पताल में हुई मौत

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बिहार बंद के दौरान राजद समर्थकों की गुंडागर्दी सौफ तौर पर देखी गई . कहीं एंबुलेंस को रोक दिया गया तो कहीं लोगों से जबरदस्‍ती लालू जिंदाबाद के नारे लगावाये गये . बालू को लेकर राजद का बंद दो परिवारों के लिये जानलेवा साबित हुआ. वैशाली के बाद कटिहार में भी बंद के कारण इलाज में हुई देरी से एक सरकारी सेवक की मौत हो गई. मृतक का नाम संतोष झा बताया जाता है जो कि इलाज के लिये अस्पताल में पहुंचने में लेट हो गये.

लेट होने से कोढ़ा अंचल कार्यालय के प्रधान सहायक संतोष झा की तड़प-तड़प कर मौत हो गयी. बताया जा रहा है की कटिहार के ही जगरनाथ पुरी के रहने वाले संतोष झा रात से ही बीमार चल रहे थे. अचानक तबियत बिगड़ने पर उन्हें कटिहार मेडिकल कॉलेज ले जाने की कोशिश की गई मगर जाम के कारण परिजनों को मजबूर हो कर फिर सदर अस्पताल के रुख करना पड़ा.

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यहां भी राजद कार्यकर्ताओ ने उन्हें सड़क पर रोक दिया. बंद समर्थकों ने काफी समझाने और विनती करने के बाद जब तक अंचल कर्मी को लेकर परिजन सदर अस्पताल पहुंचते तब तक संतोष झा की मौत हो चुकी थी. अब परिजन इस जानलेवा बंदी को कोस रहे हैं जिसके कारण संतोष की तड़प -तड़प कर मौत हो गई.

पटना से सटे हाजीपुर में उस समय मानवता शर्माती नजर आयी जब सरकार की बालू नीति के विरोध में राजद के राज्यव्यापी बंद ने महिला मरीज की जान ले ली. महनार की रहने वाली महिला सोमारी देवी को उसके परिजन गम्भीर हालत में पटना ले जा रहे थे, लेकिन राजद के बंद के कारण एम्बुलेंस जाम में ही फंस गई. जाम के कारण महिला मरीज की गांधी सेतु के टोल प्लाजा के पास पहुंचते-पहुंचते एम्बुलेंस में ही मौत हो गई.

मरीज की मौत होते ही परिजनों में कोहराम मच गया. परिजनों का कहना कि वो बंद समर्थकों से गुहार लगाते रहे लेकिन किसी ने उन्हें नहीं जाने दिया. पीड़ित परिवार ने पुलिस से भी गुहार लगाई गई लेकिन पुलिस ने भी कोई मदद नहीं की. हाजीपुर के अलावा आरा में भी बंद समर्थकों द्वारा एम्बुलेंस को जाम में रोके रखने की खबर है.

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राजधानी पटना में दीघा थाने के समीप राजद कार्यकर्ताओं ने सड़क को जाम कर दिया . लोगों को कहीं आने जाने नहीं दे रहे थे . यहां तक मीडियाकर्मियों को नहीं बख्‍शा। कहा कि लालू यादव जिंदाबाद के नारे लगाने के बाद जाने देंगे .

सिवान जिले में राजद समर्थकों की दादागिरी साफ तौर पर देखने को मिली . सिवान के बबुनिया मोड़ के पास पैर टूटने के कारण महिला को एंबुलेंस से सदर अस्पताल लाया जा रहा था . एंबुलेंस को रोक दिए जाने के कारण परिजन गोद में उठा लिए और करीब डेढ़ किमी दूर सदर अस्पताल पहुंचाया .

पटना जिले के मनेर में जिस तरीके की घटना सामने आयी है, उससे यह साफ हो गया कि राजद के नेता और कार्यकर्ता अभी भी 90 की दशक वाला बिहार बनाना चाहते हैं . बंद के दौरान एंबुलेंस स‍हित कई गाडि़यां फंसी रही . लोगों को काफी परेशानी हुई . लेकिन इससे बंद समर्थकों को क्‍या, वे एनएच 30 पर लौंड़ा नाच करवाते रहे .

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