पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र NDA के लिए काफी प्रतिष्ठा का प्रश्न

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राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के लिए पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र काफी प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। वह भी इसलिए कि केन्द्रीय कानून मंत्री रविशंकर का यहां मुकाबला इस बार भाजपा के ही सीटिंग सांसद व पूर्व केन्द्रीय मंत्री शत्रुघ्न सिन्हा से है। श्री सिन्हा इस बार कांग्रेस की टिकट पर महागठबंधन के प्रत्याशी बने हैं। इस वजह से भाजपा के नामवर नेता इस बार गत चुनाव के जीत के अंतर को भी बढ़ा कर विरोधी गठबंधन को सीख देने की फिराक में है। राजग के रणनीतिकारों ने इसके लिए सभी सहयोगी दलों के संगठन प्रमुख के साथ बैठक कर जिम्मेदारी के निर्वहन के लिए जिम्मेवार नेताओं को आगे किया है। मिली जानकारी के अनुसार भाजपा ने अपने दल से पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र के लिए राजेन्द्र गुप्ता को प्रभारी बनाया है। जनता दल यू की तरफ से इस कार्य की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी विधान पार्षद प्रो.रणवीर नंदन तथा लोकजनशक्ति पार्टी की ओर से यह कमान खुद पशु व मत्स्य संसाधन मंत्री पशुपति कुमार पारस ने संभाल ली है।भाजपा के विभिन्न प्रकोष्ठों व मूल भाजपा के पदाधिकारी रहे पूर्व विधान पार्षद राजेन्द्र गुप्ता को यह जिम्मेवारी सौंपी गई है। श्री गुप्ता विद्यार्थी परिषद में रह कर छात्र राजनीति को एक ऊंचाई पर पहुंचाया है। पटना के एक प्रतिष्ठित कॉलेज में प्रोफेसर रहने के कारण छात्र व युवाओं तथा शिक्षक वगरे पर विशेष पकड़ भी है। इस वजह से भाजपा ने नेपय से श्री गुप्ता का सक्रिय किया है। जनता दल यू ने नेपय से पटना साहिब की लड़ाई का नायक प्रो. रणवीरनंदन को बनाया है। प्रो. नंदन छात्र राजनीति में रह कर पटना विविद्यालय के महासचिव भी रहे हैं। इतना ही नहीं वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में श्री नंदन पूर्व केन्द्रीय मंत्री शत्रुघ्न सिन्हा के चुनाव प्रभारी भी रहे हैं। इनके आने से छात्र जदयू के साथ -साथ जनता दल यू के कलमजीवी प्रकोष्ठ का सहयोग पटना साहिब के सभी विधानसभा क्षेत्रों में मिलेगा। लोकजनशक्ति पार्टी की ओर से यह कमान पार्टी के अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस ने संभाल ली है। श्री पारस अभी तक केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान के चुनाव के प्रभारी रहे हैं। वर्तमान में श्री पारस पशु व मत्स्य संसाधन मंत्री भी हैं। इनके इस चुनाव में प्रमुख भूमिका से दलित मतों की गोलवंदी में युवा लोजपा पटना महागनगर के साथ-साथ दलित सेना की सक्रियता का भी फायदा राजग को होगा। दरअसल राजग गठबंधन के रणनीतिकार भाजपा से बागी हुए पूर्व केन्द्रीय मंत्री शत्रुघ्न सिन्हा को ज्यादा से ज्यादा मतों से हराना चाहते हैं।

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