पटना पुस्तक मेला दिन भर पाठकों से होता रहा गुलजार

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PATNA BOOK FAIR ME LKHAK SHIV DAYAL KI UPANYAS KI REALESE PROGRAM

पटना – कला संस्कृति एवं युवा विभाग और सीआरडी की ओर से आयोजित पटना पुस्तक मेले के दूसरे दिन सोमवार को भी दिनभर गहमा-गहमी रही। मेले में दिनभर पुस्तक प्रेमियों की भीड़ जमी रही। गांधी मैदान के पास स्थित ज्ञान भवन में आयोजित इस पुस्तक मेले में दिनभर साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं अन्य तरह के बौद्धिक कार्यक्रमों का दौर चला। इसमें कई गणमान्य साहित्यकारों और संस्कृतिकर्मियों ने भाग लिया।

पुस्तक मेले में सोमवार को कवि व लेखक शिवदयाल के उपन्यास ‘‘एक और दुनिया होती’ पर परिर्चचा हुई। यह परिर्चचा कन्वेंशन केन्द्र में रशीदन बीबी मंच पर आयोजित की गई। इसमें कवि प्रो. शैलेश्वर सती प्रसाद ने कहा कि शिवदयाल का यह उपन्यास सन् 1970 – 80 के आंदोलन और इससे उपजे अंतद्र्वद्व पर आधारित है। इसमें लेखक ने अपने पात्रों के माध्यम से बहुत बारिक संदर्भ समाहित की है। यथा पर्यावरण सुरक्षा, परमाणु युद्ध की विभिषिका की आशंका, सामाजिक ताने-बाने आदि। चिकित्सक और कवि निखिलेश्वर प्रसाद वर्मा ने बताया कि उपन्यास का लेखक अपने विचारों को पाठकों पर थोपता नहीं। उन्होंने कहा कि इस उपन्यास ने कई सामाजिक विषयों को स्पर्श किया है।

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शायर संजय कुमार कुंदन ने कहा कि लेखक शिवदयाल की यह औपन्यासिक कृति कल्पनाओं पर आधारित नहीं है, बल्कि इसे पढ़ना यथार्थ की यात्रा करने के समान है। लेखक सतीश प्रसाद सिन्हा ने कहा कि इस उपन्यास में छात्र आंदोलन के बहाने लेखक ने जीवन के अनेक पहलुओं को छुआ है। कवि और पत्रकार अनिल विभाकर ने भी उपन्यास को जेपी आंदोलन और संपूर्ण क्रांति का साहित्यिक दस्तावेज बताया।

कथाकार व नाटककार भगवती प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि उपन्यास दो खंडों में है और यह आत्मकथात्मक शैली में है। यह उपन्यास सामाजिक परिवर्तन के लिए प्रतिबद्ध समर्पित कार्यकर्ताओं की कहानी है। इस मौके पर अन्य साहित्यकारों ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए।

पटना पुस्तक मेला में पाठकों को भा रहा है ‘विद यू विद आउट यू’

पटना में आयोजित 24वें पुस्तक मेला के तीसरे दिन ‘विद यू विद आउट यू’ के लेखक प्रभात रंजन परिचर्चा के दौरान पाठकों से रूबरू हुए. उन्होंने कस्तूरबा मंच से किताब से जुड़े अपने अनुभव दर्शकों के साथ साझा किए.

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प्रभात रंजन की किताब अक्टूबर महीने में प्रकाशित हुआ था, जो कम समय में ही अमेजन बेस्ट सेलर बन गई.

परिचर्चा के दौरान दोस्ती और प्यार में अंतर्द्वंद के सवाल पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि ये दिल से जुड़े एक सरीखे दो निजी रिश्ते हैं, जिनके बीच कई बार काफी महीन रेखा होती है, तो कई बार ये आपस में ही इतने उलझे होते हैं कि निर्दोष मन के लिए उचित निर्णय कठिन हो जाता है.

‘पाठक-लेखक-संवाद’ के दौरान एक सवाल का जवाब देते हुए प्रभात रंजन ने कहा, ‘किताब एक लव ट्रायंगल है, लेकिन यह फ़िल्मी नहीं है, बल्कि हमारे बीच घटित होती सी कहानी है. उन इस कहानी के पात्र आपको अपने आस-पास हर जगह दिख जायेंगे, कुछ इस कहानी से प्रभावित दिखेंगे तो कुछ इस कहानी को प्रभावित करते दिखेंगे, जिन्हें भी मानवीय रिश्तों की विवेचना में रूचि है उन्हें यह पसंद आयेगी.’

वहीं इस दौरान उन्होंने अपनी अगली किताब ‘प्रियंका- एक पाकिस्तानी लड़की’ का भी जिक्र किया, जो भारत-पाकिस्तान के विभाजन से अबतक के दोनों देशों के संबंध और उन संबंधों से लाखों जिंदगी के बदलाव पर संवाद करती है.

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