पटना उच्च न्यायालाय में कुछ अहम् कार्यवाही

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बंद आयुव्रेदिक कॉलेज कब होंगे शुरू : हाईकोर्ट

सूबे के बंद पड़े चार आयुव्रेदिक कॉलेजों को फिर से शुरू करने को लेकर पटना उच्च न्यायालाय ने उससे संबंधित वर्तमान नीति को लागू करने को लेकर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन व न्यायमूर्ति डॉ. अनिल कुमार उपाध्याय की पीठ ने सरकार से पूछा है कि नीति लागू करने को लेकर अभी तक क्या कदम उठाया है। इसपर चार हफ्ते में जवाब दे। मालूम हो कि दशकों से चल रहे दरभंगा, बेगूसराय, भागलपुर व बक्सर के चार आयुव्रेदिक कालेज कई वर्षो से बंद हैं।आयुव्रेदिक कॉलेजों को फिर से शुरू करने की मांग करते हुए आनंद कुमार सिंह ने याचिका दाखिल की है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता बृजेश कुमार ने न्यायालय से कहा कि दशकों से चल रहे चारों मेडिकल कॉलेजों को शिक्षक व सुविधाओं के अभाव के कारण सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडिजिनियस मेडिसीन (सीसीआईएम) ने वर्षो पहले मान्यता समाप्त कर दी है। इस वजह से वहां न पढ़ाई और न ही मरीजों का इलाज होता है। जबकि उस पर करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं।

नये सिरे से बनायें सेक्शन ऑफिसरों की प्रोन्नति सूची : पटना उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से सेक्शन ऑफिसरों की प्रोन्नति सूची नये सिरे से बनाने को कहा है। न्यायमूर्ति ज्योति शरण ने इस बाबत सरकार के 1 अप्रैल, 2016 का पत्र निरस्त कर दिया है जिसमें बेसिक कैडर के आधार पर प्रोन्नति सूची बनाने को कहा था। न्यायमूर्ति ज्योति शरण ने इसी पत्र के आधार पर सेक्शन ऑफिसर से अंडर सेक्रेटरी के बारे में कहा कि उनकी प्रोन्नति नयी प्रोन्नति सूची का फलाफल माना जायेगा। उन्होंने इसके साथ ही सुनील कुमार सहित कई आफिसरों की याचिका निपटा दी। याचिकाकर्ताओं की तरफ से अधिवक्ता कुमार कौशिक ने न्यायालय से कहा कि वे लोग प्रतियोगिता परीक्षा के जरिये प्रोन्नति पाकर सेक्शन आफिसर बने हैं। इस वजह से उनका कैडर सेक्शन ऑफिसर माना जाय। अगर बेसिक कैडर के आधार पर प्रोन्नति होगी तो वे सब प्रोन्नति सूची से वंचित हो जायेंगे या सूची के सबसे निचले पायदान पर उनलोगों का नाम होगा। यह प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है। इसलिए सरकार से प्रोन्नति देने के लिये सेक्शन ऑफिसरों की सूची अलग से बनाने को कहा जाय।

शौचालय घोटाला : हिरासत में नहीं, जेल में है प्रवीण शर्मा

पटना उच्च न्यायालय ने शौचालय घोटाले के एक आरोपी प्रवीण कुमार शर्मा के पिता की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने अपने बेटे को चार दिनों से गैर कानूनी ढंग से हिरासत में रखने का आरोप लगाया था। इस मामले की जांच कर रही एसआईटी ने न्यायालय को बताया कि आरोपी को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है, जिसे अदालत के समक्ष 10 नवम्बर को पेश किया गया। अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। साथ ही उसने घोटाले में अपनी संलिप्तता स्वीकारी है। आरोपी शर्मा एक एनजीओ चलाने वाली महिला बॉबी कुमारी का पति है। एनजीओ के सभी काम उसी की देखरेख में होते थे। न्यायमूर्ति डॉ. रवि रंजन व न्यायमूर्ति एस. कुमार की पीठ ने एसआईटी के बयान के बाद आरोपी शर्मा के पिता राम नरेश शर्मा की याचिका निरस्त कर दी। शर्मा ने एसआईटी पर बेटे को चार दिनों से गैरकानूनी ढंग से हिरासत में रखने का आरोप लगाया था। उसी घोटाले में आरोपी अधीक्षण अभियंता विनय कुमार सिन्हा की मां की याचिका पर एसआईटी ने न्यायालय से उन्हें तंग नहीं करने की बात कही। न्यायमूर्ति विरेन्द्र कुमार ने एसआईटी से कहा कि वह लिखित रूप से यह बात बता दे। उन्होंने इस मामले की सुनवाई 20 नवम्बर के लिये स्थगित कर दी। अभियंता की मां प्रभा सिन्हा न्यायालय से कहा था कि वह 95 वर्षीय बीमार महिला है। एसआईटी के अधिकारी उसके बेटे के बारे में आकर रात में भी पूछते हैं और तंग करते हैं जबकि वह उसके साथ नहीं रहता है। मकान मेरे नाम है। पुलिस को वहां आने का कोई अधिकार नहीं है। एसआईटी ने कहा कि वह चार दिन पहले एक बार ही उसके घर गया और नौकर से पूछकर लौट आयी। उसने अभियंता की मां को कभी तंग नहीं किया। वह आगे से भी उसके घर नहीं जायेगी। न्यायालय ने उससे यह बात लिखित रूप से बताने को कहा है।

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