पछुआ हवा चलने से दिनभर बनी रही कनकनी, जनजीवन अस्त-व्यस्त

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भीषण कोहरे की वजह से ट्रेनों का परिचालन सुधरने का नाम नहीं ले रहा है। नतीजा यह है कि लोग ट्रेन में सफर करने के नाम से ही कांप जा रहे हैं। ट्रेन कब खुलेगी, गंतव्य तक कब पहुंचेगी और उस पर भी कि यात्रा के दिन ट्रेन खुलेगी भी या अचानक रद्द कर दी जाएगी, कुछ पता नहीं होता। इतने अनिश्चितता भरे माहौल में सफर करने से यात्री भारी तनाव में हैं। बहरहाल, कोहरे की वजह से बिहार से रविवार को पटना जंक्शन से खुलनेवाली तथा यहां से गुजरने वाली कई ट्रेनें रद्द रहीं। इसी तरह, ज्यादा ट्रेनें घंटों विलंब रहीं। इस वजह से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बहुत सारे यात्री स्टेशन आकर वापस लौट गए। दूसरी ओर ट्रेनों पर बैठे-बैठे यात्री परेशान हो रहे हैं। उन्हें निर्धारित समय से पांच से दस घंटे तक अधिक समय ट्रेन पर बिताना पड़ रहा है। ट्रेनों का परिचालन प्रभावित होने से सबसे अधिक परेशानी उन यात्रियों को होती है, जो लंबी दूरी की ट्रेनों को पकड़ने के लिए दूसरे जिलों से आते हैं। यात्री ट्रेन पकड़ने के उद्देश्य से समय पर यहां पहुंच जाते हैं, लेकिन भीषण ठंड में उन्हें घंटों जंक्शन पर गुजारना पड़ता है। परिवार एवं बच्चों के साथ यात्रा करने वाले यात्रियों का तो और भी बुरा हाल है। दरअसल, ठंड बढ़ने के साथ ही कोहरे का प्रकोप बढ़ता जा रहा है, जिसका सीधा प्रभाव ट्रेनों के परिचालन पर पड़ रहा है। लंबी दूरी की ट्रेनें इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं। रविवार को भी दिल्ली, वाराणसी, अमृतसर की ओर जाने वाली कई ट्रेनें निर्धारित समय से घंटों विलंब से चलीं। नतीजा यह है कि पटना जंक्शन की ओर आने वाली तथा यहां से खुलने वाली कई गाड़ियां अगले दिन खुल पा रही हैं। रविवार को गाड़ी संख्या -18184, दानापुर- टाटा एक्सप्रेस लगभग दो घंटे, गाड़ी संख्या -12150, दानापुर-पुणो एक्सप्रेस 2.15 घंटे, गाड़ी संख्या – 12296, संघमित्रा एक्सप्रेस 2.00 घंटे, गाड़ी संख्या -12792, दानापुर- सिकन्दराबाद 3.30 घंटे, गाड़ी संख्या – 13201, राजेन्द्र नगर टर्मिनल – लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस 2.47 घंटे, गाड़ी संख्या – 13288, साउथ बिहार एक्सप्रेस 1.53 घंटे विलंब रही। इसके अलावा कई अन्य गाड़ियां भी घंटों विलंब रहीं।

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