नियोजित शिक्षकों के समान काम, समान वेतन मामले में सुनवाई पूरी अदालत ने सुरक्षित रखा है फैसला

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राज्य के लगभग पौने चार लाख नियोजित शिक्षकों को समान काम के बदले समान वेतन मामले पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को 25वें दिन न्यायमूर्ति द्वय अभय मनोहर सप्रे और उदय उमेश ललित की खंडपीठ में लम्बे समय से चल रही सुनवाई पूरी हो गई है। अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।बुधवार को कोर्ट नंबर-11 में न्यायाधीश द्वय के समक्ष सर्वप्रथम बिहार सरकार के अधिवक्ता श्याम दीवान, दिनेश द्विवेदी और आरके द्विवेदी ने रिज्वाइन्डर पेश किया जिसमें उन्हीं पुराने तय वित्त का अभाव, स्थानीय निकायों का मसला आदि दोहराया गया। सरकारी अधिवक्ताओं के द्वारा पेश किये गये रिज्वाइन्डर के जवाब में शिक्षकों का पक्ष रखते हुए बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ की ओर से वरीय अधिवक्ता पूर्व सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार, प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और विजय हंसरिया ने प्रतिवाद किया। राज्य सरकार के वकीलों के द्वारा दिये गये रिज्वाइन्डर, जिसमें प्रमुख रूप से संविधान पीठ का चर्चित जजमेंट, वेतन मद की अव्यवहृत राशि वापस नहीं करने संबंधी असत्य, विभिन्न राज्यों खासकर झारखंड, असम, पश्चिम बंगाल राज्यों के शिक्षकों के वेतन से तुलना, 25 हजार रुपये वेतन लेकर भी नहीं पाने की असत्य दलीलें इत्यादि पेश की गयी थीं। इन सारे दलीलों व दस्तावेज को वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, रंजीत कुमार और विजय हंसरिया ने साक्ष्य सहित खारिज किया तथा शिक्षकों के पक्ष को जोरदार तरीके से रखकर सभी कोटि के नियोजित शिक्षकों एवं पुस्तकालयाध्यक्षों को समान काम समान वेतन लागू करवाने के लिए माननीय न्यायाधीशों से फैसला देने की अपील की। श्री सिब्बल, रंजीत कुमार व हंसरिया ने स्पष्ट कहा कि विद्वान अधिवक्ता श्याम दीवान द्वारा पेश जजमेंट प्रोन्नति से संबंधित है, इसका समान काम समान वेतन मामले से कोई संबंध नहीं है। इन सभी अधिवक्ताओं ने बिहार सरकार एवं प्रोजेक्ट एप्रूवल बोर्ड की विभिन्न रिपोटरे एवं पत्रों को पेश किये और स्पष्ट किया कि बिहार सरकार ने वेतन एवं सर्व शिक्षा अभियान मद की राशि केन्द्र सरकार को वापस किया है। इस मामले में बिहार सरकार असत्य बोल रही है। उन्होंने साक्ष्य सहित कोर्ट को कहा कि झारखंड, असम, बंगाल राज्यों में पारा शिक्षकों को मानदेय ही मिल रहा है तथा वहां अस्थायी पद पर बहाल हैं। जबकि बिहार के नियोजित शिक्षकों को वेतनमान दिया गया है तथा वे 60 वर्षो की आयु के लिये स्थाई सेवा में हैं। अधिवक्ताओं ने न्यायालय से मांग की कि विशेष अनुमति याचिका खारिज करते हुए पटना उच्च न्यायालय के न्याय निर्णय को अक्षरश: लागू करने का आदेश दें, साथ ही नियुक्ति तिथि से समान वेतन का निर्धारण किया जाए जबकि आर्थिक लाभ इस मामले में प्रथम याचिका के दायर वर्ष 2009 से दिया जाए। शिक्षकों की ओर से एआरओ अभय कुमार ने लिखित रूप से कोर्ट के समक्ष रिज्वाइन्डर पेश किया। सुनवाई के बाद मीडिया से रू-ब-रू होते हुए बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के महासचिव सह पूर्व सांसद शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार ने एक सुनियोजित साजिश कर इस केस को लंबा खींचकर, न्यायालय के समक्ष अतार्किक, थोथी, गलत दलील प्रस्तुत कर राज्य के नियोजित शिक्षकों का मनोबल गिराने की साजिश रची थी जिसे राज्य के नियोजित शिक्षकों की एकजुटता व हौसला ने विफल कर दिया।

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