नाटक ‘‘पालकी पालना’ का मंचन

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PREM CHAND RANG SHALA MEN NUKKAR NATAK

पटना – कालिदास रंगालय में चल रहे छह दिवसीय इप्टा युवा नाटय़ उत्सव के दूसरे दिन भागलपुर इप्टा की ओर से नाटक ‘‘बाघिन’ का मंचन किया गया। नाटक का आलेख देवेंद्र सिंह का और निर्देशन रितेश रंजन का था। नाटक के माध्यम से समाज में व्याप्त चिकित्सा व्यवस्था पर चोट की गयी।नाटक का कहानी गंगिया और उसके परिवार के आस-पास घूमती है। गंगिया की पतोहू का प्रसव होने वाला है, लेकिन उसके पास अस्पताल जाने तक के पैसा नहीं हैं। हरजु रुदल खलीफा से पैसे मांगता है। फिर गांव के कुछ युवकों को साथ लेकर अस्पताल निकलता है। सबसे पहले लखना बहू को प्राइवेट अस्पताल ले जाता है, जहां उसे दुत्कार कर भगा दिया जाता है। उसके बाद मात्र सरकारी अस्पताल का रास्ता बजता है। आनन-फानन में सभी उसी तरफ दौड़ते हैं। वहां की अव्यवस्था देखकर सभी घबरा जाते हैं। गंगिया डॉक्टरनी और नर्स से गुहार लगाती है कि मेरी पतोहु और होने वाले बच्चे को बचा ले। पहले तो वह मना करती है लेकिन बाद में हालत ज्यादा खराब देखकर इलाज शुरू करती है। ऑपरेशन की तैयारी की जाती है, मगर समय पर इलाज नहीं होने के कारण ऑपरेशन सफल नहीं हो पाता। बहू और बच्चा दोनों मर जाते हैं। यह सुनकर गंगिया डॉक्टरनी पर टूट पड़ती है। उसके केस खुलकर बिखर जाते हैं और आंखें लाल हो जाती है। वह बाघिन की तरह दहाड़ने लगती है। नाटक में परवेज आलम, साहिल सिंह, गुणनीधि प्रकाश लाल पंडित, विपिन कुमार, मेघा कुमारी, सुमित मिश्रा, गोविंद निराला, कुमार सत्यम, कृष्ण कुमार, अंकित कुमार, नितिन अनिमेष, सोनू कुमारी, नेहा कुमारी, रानी चौधरी, संजय सुमन, अनुलय कुमार अनु, खुशबू कुमारी, आलोक चौधरी और करण कुमार ने अभिनय किया। 

 प्रेमचंद रंगशाला में वृहस्पतिवार को नाटक ‘‘पालकी पालना’ का मंचन किया गया। हज्जू म्यूजिकल थिएटर के तत्वाधान में आयोजित इस नाटक का आलेख विनोद रस्तोगी का और निर्देशन सुरेश कुमार हज्जू का था। नाटक के माध्यम से बाल विवाह जैसी कुरीति पर चोट किया गया। नाटक में बच्ची के माता-पिता उसकी शादी तय कर देते हैं। बच्ची को इस बारे में कुछ पता नहीं होता है। नाटक में बच्चे की क्या भावना है, ससुराल क्या होती है इन सब बातों को भी दिखाया जाता है। नाटक का एक पात्र नारद बच्ची के पिता को समझाने की कोशिश करता है कि बाल विवाह से क्या-क्या समस्याएं पैदा हो सकती हैं। उसके बाद पिता को यह बात समझ में आती है। फिर वह प्रतिज्ञा करता है कि उसे बच्ची को पढ़ाना है, आगे बढ़ाना है और समय पर शादी करना है। अंत में सभी बच्चे आम जनता से सवाल करते हैं कि क्या बाल विवाह और दहेज लेना सही बात है।

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