नाटक ‘‘खुदा हाफिज’ का मंचन

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पटना । कालिदास रंगालय में संस्था किसलय की ओर से आयोजित इंटरनेशनल शरद नाटय़ संगम, 2017 के तीसरे दिन बृहस्पतिवार को भारतीय जन नाटय़ संघ (इप्टा) के तत्वावधान में नाटक ‘‘खुदा हाफिज’ का मंचन किया गया। नाटक का आलेख समरेश बसु और निर्देशन तनवीर अख्तर का था।नाटक में दिखाया गया कि दंगों में सिर्फ इंसानियत का खून होता है। सन् 1947 में हिन्दुस्तान आजाद हुआ, लेकिन आजादी की इस खुशी के साथ मिला विभाजन का जख्म। राम और रहमान के नाम पर जो दंगे हुए उसमें दोनों तरफ के लोग मारे गए। दुर्भाग्य की बात है कि आज भी कहीं- कहीं ऐसी घटना अक्सर सुनने को मिलती है। नाटक यही बात दर्शकों के सामने रखता है। जब दंगे होते हैं तो न हिन्दू मरते हैं और न मुसलमान, मरता है तो इंसानियत। कफ्र्यू के दौरान जब दो मजदूर फंस जाते हैं और निकलने का कोई रास्ता नहीं बचता, तो उनकी मजबूरी होती है कूड़े के डिब्बे में वक्त गुजारने की। दोनों अपनी जान बचाने के लिए एक-दूसरे से अपनी पहचान छुपाने की कोशिश करते हैं। लेकिन जब पहचान एक-दूसरे के सामने खुलती है, तो उनका भ्रम टूटने लगता है। दोनों में मानवीय संवेदना का रिश्ता बनता है, तो उन्हें एक-दूसरे के जात-धर्म से कोई फर्क नहीं पड़ता। फिर दोनों एक-दूसरे की जान बचाते हैं और जरूरत पड़ने पर दूसरे के लिए अपनी जान खतरे में भी डालते हैं। नाटक में राहुल कुमार सिंह, आमिर अब्बास, संजय, अक्षय, अभिमन्यु, रोशन, निखिल, चन्दन प्रभात, टीपू सुल्तान, उमाकांत, रणजीत ने भाग लिया। वहीं, दूसरे नाटक के रूप में संस्था सुगेरयात्री (पश्चिम बंगाल) की ओर से नाटक ‘‘इरावती एती मेयर नाम’ का मंचन किया गया। नाटक बंगला भाषा में था। नाटक का आलेख शंकर बसु ठाकुर का और निर्देशन राम कृष्ण मंडल का था।

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