नाकामी भरे रहे नमो के चार साल : मांझी

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हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (से) के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि मोदी के चार साल नाकामी भरे तो रहे ही साथ-ही-साथ यह सरकार दलित विरोधी के रूप में जानी जाएगी। श्री मांझी आज अपने आवास पर पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे। श्री मांझी ने कहा कि मोदी सरकार के शासन में चार साल में सबसे ज्यादा दलितों का अहित हुआ है। केंद्र की सरकार ने आरक्षण में आरक्षण देकर आरक्षण और दूसरी ओर सरकारी नौकरियों कटौती कर निजी क्षेत्रों को देख कर आरक्षण को ही समाप्त करने का काम किया है। उन्होंने केन्द्र सरकार से एक वैसे आयोग की गठन की मांग की जो 1952 के बाद सरकारी नौकरियों में दलितों की स्थिति का मूल्यांकन कर सके। आजादी के बाद 80 प्रतिशत नौकरियां सरकारी थीं। अब यह घट कर 40 प्रतिशत तक पहुंच गयी है। श्री मांझी ने कहा कि आज जहां किसानों की आमदनी को बढ़ाने की बात केन्द्र सरकार करती है मगर किसानों को लागत मूल्य से भी कम दे रही है।अच्छी पैदावार के बावजूद विदेश से अनाज मंगा रहे हैं। स्थिति यह है कि 24 घंटे में 35 किसान आत्महत्या कर रहे हैं। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के तहत 15 वर्ष तक बेटियों के हित में 6.5 करोड़ खर्च का लक्ष्य रखा गया। यानी 5 पैसे प्रति बच्ची ।यह मजाक नहीं तो और क्या है ?जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन योजना में एक लाख करोड़ खर्च करना था। उक्त योजना का नाम बदल कर अमरूत और स्मार्ट सिटी रखा गया। लक्ष्य था 77640 करोड़ पर 4 साल में 263 करोड़ ही खर्च कर सकी। स्मार्ट सिटी लक्ष्य 264 परियोजना था पर मात्र 23 परियोजना पर काम चल रहा है।राजीव गांधी आवास योजना का नाम हाऊसिंग फॉर ऑल कर दिया। वादा के मुताबिक दो करोड़ का लक्ष्य था पर 4 वर्ष में 33 हजार ही घर बनाये जा सके जो लक्ष्य का मात्र 3 प्रतिशत है। 2 करोड़ युवाओं को रोजगार प्रतिवर्ष देने का वादा मोदी सरकार ने किया था पर मात्र 4.16 लाख प्रतिवर्ष रोजगार दिया जा रहा है। मोदी सरकार की विदेश नीति का हाल यह है कि अमेरिका में एच 4, एच-1 वीजा नीति के कारण 7.5 लाख लोगों की नौकरियां खतरे में पड़ गयी हैं। शिक्षा सेस के नाम पर सरकार से 16 0 786 करोड़ों वसूली है। मगर यूजीसी का बजट 67.5 प्रतिशत कम कर दिया गया है।श्री मांझी ने कहा नगर वाला, विजय माल्या, मोसुल, नीरव मोदी आदि भगोड़ों के माध्यम से देश का पैसा बाहर भेजा गया। इन रुपयों से देश में विकास के कई काम किये जा सकते थे। लाल किला जैसी ऐतिहासिक इमारत का रखरखाव सरकार नहीं कर पा रही है और उसे डालमिया को देना पड़ा। कल वह ताजमहल और संसद भवन को भी निजी कंपनियों को दे सकते हैं तो यह सरकार क्या कर रही है ? जो अपनी धरोहर को भी अपने तंत्र के माध्यम से नहीं बचा पा रही वह देश को कैसे बचा पायेगी। इस मौके पर पूर्व मंत्री डॉ. अनिल कुमार, पार्टी के मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता डा. दानिश रिजवान, नौशाद साहब, प्रदेश प्रवक्ता अनामिका पासवान, जय शंकर शर्मा, राजीव बलमा बिहारी, गीता पासवान, रौशन देवी, तनवीर उर रहमान, हेमलता पासवान, अमरेंद्र कुमार त्रिपाठी आदि मौजूद थे।

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