नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय चैती छठ महापर्व शुरू

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Patna-Apr.9,2019-Chhath devotees are bathing in Ganga river at NIT Ghat in Patna on the occasion of Nahay-Khay Pooja of Chaiti Chhath festival.

प्रदेश के राज्यपाल लाल जी टंडन ने चैती छठ के सुअवसर पर बिहारवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। राज्यपाल श्री टंडन ने कहा है कि सूर्य की पूजा-आराधना से जुड़ा चैती छठ पर्व बिहारवासियों के जीवन में सुख, समृद्धि और आनन्द लाये, सूर्य देवता से यही अभ्यर्थना है। उन्होंने कहा है कि इस व्रत से हमें आत्मसंयम, पवित्रता और भक्ति की अनुपम प्रेरणा मिलती है। वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोक आस्था के महापर्व चैती छठ के अवसर पर राज्य के लोगों को मंगलवार को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। नीतीश ने शुभकामना संदेश में कहा कि छठ आत्मानुशासन का पर्व है। इस पर्व में लोग आत्मिक शुद्धि व निर्मल मन से भगवान सूर्य को अघ्र्य अर्पित करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि चैती छठ राज्यवासियों के लिये सुख, समृद्धि एवं शांति लेकर आये।

वासंतिक नवरात्र

मां दुर्गाजी के पांचवें स्वरूप को स्कन्दमाता के नाम से जाना जाता है। ये भगवान् स्कन्द ‘‘कुमार कात्तिर्केय’ की माता हैं। इन्हीं भगवान् स्कन्द की माता होने के कारण मां दुर्गा जी के इस पांचवें स्वरूप को स्कन्दमाता के नाम से जाना जाता है। इनकी उपासना नवरात्र-पूजा के पांचवें दिन की जाती है। इस दिन साधक का मन ‘‘विशुद्ध’ चक्र में अवस्थित होता है। स्कन्दमातृस्वरूपिणी देवी की चार भुजाएं हैं। ये दाहिनी तरफ की ऊपर वाली भुजा से भगवान् स्कन्द को गोद में पकड़े हुए हैं और दाहिनी तरफ की नीचे वाली भुजा जो ऊपर की ओर उठी हुई है उसमें कमल-पुष्प है। बायीं तरफ की ऊपर वाली भुजा वर मुद्रा में तथा नीचे वाली भुजा जो ऊपर की ओर उठी है उसमें भी कमल-पुष्प ली हुई हैं। इनका वर्ण पूर्णत: शुभ्र है। ये कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। इसी कारण से इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। सिंह भी इनका वाहन है।मां स्कन्दमाता की उपासना से भक्त की समस्त इच्छाएं पूर्ण हो जाती हैं। इस मृत्युलोक में ही उसे परम शान्ति और सुख का अनुभव होने लगता है। उसके लिए मोक्ष का द्वार स्वयमेव सुलभ हो जाता है। 

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