धान उत्पादन बढ़ाने में सहायक होगी सामुदायिक नर्सरी योजना

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कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2019-20 में राज्य योजना के अंतर्गत खरीफ मौसम में कुल 917.342 लाख रुपये की लागत से 52300 एकड़ क्षेत्र में धान की सामुदायिक नर्सरी विकास योजना का कार्यान्वयन किया जायेगा।कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि रोड मैप के अधीन राज्य में गुणवत्तायुक्त उत्तम किस्म के धान के बीज के उत्पादन तथा इसकी उपलब्धता समय पर सुनिश्चित करने के लिए खरीफ मौसम में धान की सामुदायिक नर्सरी तैयार की जा रही है। धान की नर्सरी में तैयार बिचड़ों को इच्छुक एवं जरूरतमंद कृषकों के बीच नि:शुल्क वितरित (शत प्रतिशत अनुदान पर) किया जायेगा। उन्होंने बताया कि इस योजना से सिंचाई सुविधा रहित एवं भूमिहीन जोत करने वाले किसानों को समय पर धान की रोपनी करने में मदद मिलेगी। इस योजना से सुखाड़ या बाढ़ की स्थिति में बिचड़ा क्षतिग्रस्त होने पर किसान को पुन: धान की समय पर रोपनी हेतु बिचड़ा उपलब्ध कराया जायेगा। डॉ. कुमार ने कहा कि सामुदायिक नर्सरी का विकास कलस्टर में किया जाएगा तथा। कलस्टर का न्यूनतम रकवा पांच एकड़ होगा। एक कृषक को अधिकतम एक हेक्टेयर (2.5 एकड़) में धान रोपनी हेतु बिचड़ा उपलब्ध कराया जा सकेगा। नर्सरी स्थल के चयन में इच्छुक लघु एवं सीमांत कृषकों के समूह को प्राथमिकता दी जायेगी। लक्ष्य शेष रहने पर लघु एवं सीमांत कृषक को वरीयता दी जाएगी तथा अंत में शेष लक्ष्य मध्यम एवं बड़े कृषक से पूरा किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि नर्सरी विकास हेतु स्थानीय परिस्थिति के आलोक में अल्प अवधि अथवा मध्यम अवधि के प्रभेदों का चयन जिला कृषि पदाधिकारी द्वारा जिला के स्थानीय कृषि विज्ञान केन्द्र/कृषि विशेषज्ञ से परामर्शानुसार कर किया जाएगा। इससे संबंद्ध किसानों की पसंद एवं स्थान विशेष के लिये अधिक उपलशील लोकप्रिय प्रभेद को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि नर्सरी ऊंचे स्थल पर पर्याप्त सिंचाई सुविधायुक्त होगी ताकि वह बाढ़, अत्यधिक वष्ा अथवा सुखाड़ से प्रभावित नहीं हो।

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