धर्म के रास्ते अलग हो सकते हैं, लेकिन मंजिल होती है एक: कोविंद

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राजगीर। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का मानना है कि धर्म के रास्ते अलग हो सकते हैं, लेकिन मंजिल एक ही होती है। बृहस्पतिवार को नालंदा अंतरराष्ट्रीय विविद्यालय और इंडिया फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय ‘‘धम्मा धर्म’ सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद राष्ट्रपति ने कहा कि भगवान बुद्ध का मध्य मार्ग ही तमाम तरह की हिंसा को रोकने में मील का पत्थर साबित हो सकता है। ऐसे में इस बात पर सभी को विचार करना होगा कि अहिंसा, सद्भाव और प्रेम के रास्ते पर कैसे लौटा जाये। उन्होंने कहा कि आज भगवान बुद्ध के मार्ग को सभी के बीच में पहुंचाने की जरूरत है। इस सम्मलेन की सार्थकता तभी सिद्ध होगी, जब आप सभी यहां से बाहर निकलकर प्रेम और अहिंसा का पाठ लोगों को पढ़ाएंगे। यह समाज और विश्व क्रोधमुक्त, हिंसा मुक्त व भय मुक्त हो, इसके लिए बुद्ध के मार्ग पर चलने की जरूरत है। राष्ट्रपति ने कहा कि नालंदा प्राचीन शैक्षणिक पण्राली को प्रतिबिंबित करता है, जो प्राचीन भारत में छात्रों और शिक्षकों के रूप में शक्तिशाली मन को आकर्षित करता था।अंतरराष्ट्रीय विवि नालंदा और इंडिया फाउंडेशन ने इतनी अच्छी पहल की है कि वो भी 25 एशियन डायलॉग रिलेशनशिप की वर्षगांठ पर धर्म कोई भी हो रास्ते सभी के एक हैं-अहिंसा, प्रेम और इंसानियत। उन्होंने कहा कि 26 जनवरी को 10 एशियाई देशों के प्रतिनिधि हमारे विशेष मेहमान होंगे। धर्म व धम्म एक ही शब्द है। संस्कृत व पाली का यह शब्द सिर्फ और सिर्फ प्रेम व करुणा की ही बात करता है। आज जरूरत है बुद्ध के बताये रास्तों के बूते अन्य देशों के बीच समाधान का रास्ता बनाने की। उन्होंने कहा कि ये पहल बौद्ध धर्म के सिद्धांतों को लोकप्रिय बनाने में काफी लंबा रास्ता तय करेगी। वे आने वाली पीढ़ियों को आसानी से मानवता, सहनशीलता, अनुशासन और करुणा के सर्वोच्च आदशोर्ं के साथ जुड़ने में मदद करेगी। उद्घाटन समारोह में रामनाथ कोविंद, राज्यपाल सत्यपाल मलिक व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, श्रीलंका के विदेश मंत्री तिलक मारापना, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, विदेश मंत्रालय की सचिव प्रीति शरण, कुलपति सुनैना सिंह सांसद कौशलेंद्र कुमार, मंत्री श्रवण कुमार, विधायक डॉ. जितेंद्र, विधायक रवि ज्योति, विधायक चंद्रसेन व इंडिया फाउंडेशन के राम माधव सहित कई देशों के डेलीगेट्स मौजूद थे।

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