देशभर के 3 लाख डॉक्टर आज हड़ताल पर,

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नेशनल मेडिकल कमीशन बनाने के सरकार के नए प्रस्ताव के खिलाफ आज (2 जनवरी को) इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) से जुड़े देशभर के करीब 3 लाख डॉक्टर हड़ताल पर हैं. मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने सोमवार को ऐलान किया था कि 2 जनवरी को देशभर के लगभग सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में डॉक्टर सेवाएं नहीं देंगे. आईएमए की ओर से 12 घंटे तक रोजमर्रा की चिकित्सा सेवाएं बंद रखने के आह्वान के मद्देनजर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी केंद्रीय सरकारी अस्पतालों से स्वास्थ्य सेवाएं और आपातकालीन सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए “जरूरी” कदम उठाने को कहा है.

भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) को नई संस्था से बदलने के लिए लाए जाने वाले विधेयक के विरोध में आईएमए ने 2 जनवरी को रोजमर्रा की चिकित्सा सेवाएं बंद रखने का आह्वान किया था. 2.77 लाख डॉक्टर आईएमए के सदस्य हैं.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने परामर्श में कहा कि हमारी संज्ञान में आया है कि आईएमए 2 जनवरी 2018 को एक-दिवसीय हड़ताल पर होगा. हड़ताल में बड़ी संख्या में चिकित्सकीय पेशेवर शामिल हो सकते हैं. अनुमान लगाया गया है कि इससे रोगियों को अस्पतालों में असुविधा हो सकती है. यह अनुरोध किया जाता है कि रोगी के स्वास्थ्य देखभाल और आपातकालीन सेवाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए सभी आवश्यक उपाय किए जाए. मंत्रालय ने यह सलाह एम्स, सफदरजंग अस्पताल और केंद्र सरकार द्वारा संचालित अस्पतालों को जारी की. मंत्रालय ने अस्पतालों से एक अनुपालन रपट भी मांगी है.

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हड़ताल की ये है वजह
फिलहाल मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया देशभर के मेडिकल प्रोफेशनल्स की प्रतिनिधि संस्था है. देश का कोई भी रजिस्टर्ड डॉक्टर इसका चुनाव लड़ सकता है और अपना लीडर चुनने के लिए वोट कर सकता है. नेशनल मेडिकल कमीशन बनने के बाद इसमें गवर्मेंट द्वारा चुने गए चेयरमैन और सदस्य रखे जाएंगे. इसके अलावा बोर्ड मेंबर्स को कैबिनेट सेक्रेटरी के अंडर में काम करने वाली सर्च कमेटी चुनेगी.

इंडियन मेडिकल काउंसिल को नेशनल मेडिकल कमीशन बिल 2017 के प्रावधानों से एतराज है. नए बिल के मुताबिक अब तक प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में 15% सीटों का फीस मैनेजमेंट तय करती थी. अब नए बिल के मुताबिक मैनेजमेंट को 60% सीटों का फीस तय करने का अधिकार होगा. इसमें पहले 130 सदस्य होते थे और हर राज्य का तीन प्रतिनिधि होता था. अब नए बिल के मुताबिक कुल 25 सदस्य होंगे, जिसमें 36 राज्यों में से केवल 5 प्रतानिधि ही होंगे.

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