दूध मार्केट बचाने के लिए भारी बारिश में धरने पर बैठे तेजस्वी यादव

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आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव के छोटे बेटे और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव बुधवार की शाम पटना जंक्शन के पास दूध मार्केट पहुंचे और भारी बारिश के बीच धरने पर बैठ गए. दूध मार्केट तोड़े जाने का विरोध कर रहे आरजेडी नेता तेजस्वी ने कहा कि सरकार स्मार्ट सिटी के नाम पर गरीबों को तंग कर रही है. दूध बेचने वाले किसानों को तंग कर रही है. सरकार लालू यादव के किए गए कामों को मिटाना चाहती है.

आरजेडी नेता ने कहा यदि दूध वालों को पुनर्स्थापित नहीं किया गया तो राज्य में बड़ा आंदोलन होगा. हम अपने खून का कतरा-कतरा बहा देंगे लेकिन चुप नहीं बैठेंगे. खास बात है कि तेज बारिश में भी तेजस्वी यादव धरने पर बैठे हैं. उनके थोड़े समर्थक भी है और हटने का नाम नही ले रहे हैं. उनकी मांग है कि जब तक कोई अधिकारी बात नहीं करेगा, तब तक धरना से नहीं हटेंगे.

तेजस्वी ने ट्वीट कर कहा, ‘पटना रेलवे जंक्शन के पास दशकों से स्थित दुग्ध मार्केट को नीतीश प्रशासन ने अचानक ध्वस्त कर दिया. दूध व्यवसायियों ने प्रशासन से मार्केट तोड़ने के आदेश की कॉपी मांगी लेकिन प्रशासन यह दिखाने में असमर्थ रहा और बंदूक की नोंक पर जबरदस्ती एक मंदिर सहित मार्केट को तोड़ दिया.’

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एक दूसरे ट्वीट में तेजस्वी ने कहा, ‘भारी बारिश के बावजूद ढाई घंटे से घटनास्थल पर हूं लेकिन कोई भी वरिष्ठ अधिकारी यहां मार्केट तोड़ने के आदेश की कॉपी लेकर नहीं आया है. सभी बड़े अधिकारियों ने फोन बंद कर लिए हैं. परसों जन्माष्टमी है लेकिन आज ही भगवान श्रीकृष्ण मंदिर को तोड़ दिया. कायर सरकार छुप क्यों रही है?

मंगलवार की देर रात पटना लौटे तेजस्वी अब जमीन की राजनीति की ओर मुड़ रहे हैं. इसका दृश्य बुधवार की देर शाम को तब दिखा जब वह पटना जंक्शन के पास बनी दूध मंडी को तोड़े जाने के खिलाफ धरने पर बैठ गए.

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तेजप्रताप ने दिया तेजस्वी का साथ
करीब साढ़े आठ बजे शाम से वह अपने लाव-लश्कर के साथ धरने पर बैठ गए. मंडली संग धरने पर बैठे तेजस्वी के साथ उनके कार्यकर्ता भजन कीर्तन करते रहे. लंबे अरसे के बाद तेजस्वी धरने पर बैठे थे. इसमें उनके बड़े भाई तेजप्रताप यादव का भी उनको साथ मिला.

इसलिए ‘जमीन’ पर बैठे लालू के लाल
माना जा रहा है कि तेजप्रताप-तेजस्वी को सड़क पर इसलिए बैठना पड़ा कि यहां इनके सबसे बड़े वोट बैंक (यादव समुदाय) की खास पहचान पर प्रशासन का बुलडोजर चला था. अगर यहां चूकते तो वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में खामियाजा भुगतना पड़ता. ऐसे में लालू को विरासत को बचाने के लिए ‘कृष्ण-अर्जुन’ ने जिला प्रशासन और सरकार के खिलाफ जमकर निशाना साधा और घंटों डटे रहे.

धरने के दौरान ही जब तेजस्वी से यह पूछा कि बाढ़ की तबाही और चमकी बुखार के कहर के बीच आप कहां थे? लोग आपको ढूंढ़ रहे थे. इस पर तेजस्वी मीडिया से ही सवाल कर बैठे- पीएम कहां थे? मंगल पांडे कहां थे? सूबे के मुखिया नीतीश जी कहां थे?

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‘गरीबों का आशियाना उजाड़ रहे सीएम नीतीश’
तेजस्‍वी यादव ने कहा, ‘हमसे जो आप पूछते हैं जरा उनसे भी तो पूछिए कि लालू जी ने जिन गरीबों को बसाया, नीतीश जी एक-एक कर उन गरीबों का आशियाना क्‍यों उजाड़ रहे हैं? तेजस्वी ने आगे कहा कि खबर तो ये है कि नीतीश जी को लालू यादव और राबड़ी देवी की प्रतिमा पसंद नहीं है. हम उनके बेटे हैं, ऐसे ही छोड़ देंगे ?

वोट बैंक खोने के डर से एक हुए ‘कृष्ण-अर्जुन’ !
भले ही कृष्ण अर्जुन में 36 का आंकड़ा हो. परिवार में सत्ता संघर्ष चल रहा हो, लेकिन वोट बैंक के खातिर दोनों भाई इस मसले पर एक हो गए. हालांकि, घंटों मशक्कत के बाद जिला प्रशासन ने तेज-तेजस्वी को इस आश्वासन पर मना लिया कि दूध मार्केट उजड़ गया तो क्या हुआ दूसरा मार्केट बसा देंगे. इसके बाद हरिकीर्तन भी रूका और लालू के दोनों लाल अपने-अपने घर भी चले गए.

अब सवाल ये है कि इस धरने का दूध कारोबारियों को कितना फायदा पहुंचेगा ये तो वक्त बताएगा, लेकिन दोबारा सक्रिय राजनीति में लौटे तेजस्वी का यह धरना पार्टी के लिए जितना फायदेमंद साबित होगा उससे कहीं ज्यादा तेजस्वी के लिए यह संजीवनी का काम करेगा.

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