दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं दिया जा सकता, एलजी कैबिनेट की सलाह से काम करें: सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार बनाम एलजी मामले में बुधवार को इस पर फैसला सुनाया। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं दिया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि शक्ति एक जगह केंद्रित नहीं हो सकती है लेकिन एलजी ही दिल्ली के प्रसाशक हैं। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की संविधान पीठ अलग-अलग फैसला पढ़ेंगे। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा सबसे पहले अपना फैसला पढ़े। फिर बहुमत के आधार पर अंतिम फैसला सामने आएगा। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि उपराज्यपाल ही दिल्ली के प्रशासनिक मुखिया हैं और कोई भी फैसला उनकी मंजूरी के बिना नहीं लिया जाए।

फैसले को चुनौती देने के बाद मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पांच जजों की बेंच ने पिछले साल 2 नवंबर से सुनवाई शुरू की थी। महज 15 सुनवाई में पूरे मामले को सुनने के बाद 6 दिसंबर को फैसला सुरक्षित रखा गया था। आम आदमी पार्टी की सरकार की ओर से पी चिदंबरम, गोपाल सुब्रह्मण्यम, राजीव धवन और इंदिरा जयसिंह जैसे नामी वकीलों ने दलीलें पेश की थी।

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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक बार कोर्ट ने कहा था कि पहली नज़र में उपराज्यपाल ही दिल्ली के प्रमुख नज़र आते हैं लेकिन रोज़ाना के कामकाज में उनकी दखलंदाज़ी से मुश्किल आ सकती है। दिल्ली के लोगों के हित मे राज्य सरकार और एलजी को मिल कर काम करना चाहिए। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा था कि चुनी हुई सरकार के पास कुछ शक्तियां होनी चाहिए, नहीं तो वह काम नहीं कर पाएगी।

वहीं, इस पर केंद्र और उप-राज्यपाल की तरफ से ये दलील दी गई थी कि दिल्ली एक राज्य नहीं है, इसलिए उपराज्यपाल को यहां विशेष अधिकार मिले हैं। जबकि दिल्ली सरकार की दलील थी कि दिल्ली का दर्जा दूसरे केंद्रशासित क्षेत्रों से अलग है। संविधान के अनुच्छेद 239 AA के तहत दिल्ली में विधानसभा का प्रावधान किया है। यहां निर्वाचित प्रतिनिधियों के ज़रिए एक सरकार का गठन होता है। उसे फैसले लेने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। बता दें कि 2015 में दूसरी बार सत्ता में आने के बाद से ही केजरीवाल सरकार और उप-राज्यपाल के बीच अधिकारों की जंग चल रही है।

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पहले तत्कालीन एलजी नजीब जंग के साथ केजरीवाल सरकार का विवाद चला, बाद में दिसंबर, 2016 में अनिल बैजल के एलजी बनने के बाद से दोबारा शुरू हुई ये जंग अब तक जारी है। विवादों की बात करें तो मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ मारपीट के बाद अधिकारियों ने हड़ताल कर दी। घर-घर राशन वितरण की योजना को मंजूरी नहीं देने पर भी विवाद रहा। इसे लेकर पिछले दिनों केजरीवाल ने 3 मंत्रियों के साथ 9 दिन तक उपराज्यपाल सचिवालय में धरना और भूख हड़ताल भी की थी। हालांकि आज तीन साल से चल रही इस जंग का पटाक्षेप हो सकता है।

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