दारोगा बहाली परीक्षा परिणाम पर रोक से कोर्ट का इनकार

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पटना हाईकोर्ट ने दारोगा नियुक्ति पर लगी रोक को हटाने से बृहस्पतिवार को इनकार कर दिया है। पुलिस सब ऑर्डिनेंट कमीशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति शिवजी पांडेय की एकल पीठ ने राज्य में दारोगा नियुक्ति के अंतिम परिणाम पर लगे स्टे को बरकरार रखा है। पुलिस सब ऑर्डिनेंट ने एक याचिका दायर कर कहा था कि बहाली पर लगी रोक को हटा दिया जाये। वहीं नियुक्ति प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाकर दायर की गयी याचिका पर सुनवाई में सरकार की ओर से जो कांउटर एफेडेविट फाइल किया, उसमें गोलमटोल जवाब देते हुए बहाली प्रक्रिया को सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया गया। गौरतलब है कि पिछली सुनवाई में लिखित परीक्षा का परिणाम घोषित करने पर हुई बहस में सरकार की ओर से कहा गया था कि चयन प्रक्रिया अभी अधूरी है। फाइनल रिजल्ट यह नहीं है। इस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए विभाग से इंस्ट्रक्शन लेने और काउंटर एफेडेविट फाइल करने को कहा था, जिसके बाद कल की सुनवाई में सरकारी वकील की ओर से कांउटर एफेडेविट पेश किया गया। इससे कोर्ट संतुष्ट नहीं हुआ। सरकारी वकील को 18 सितम्बर को डिटेल एफेडेविट फाइल करने का आदेश दिया गया है।परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप दायर करने वाले याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता चक्रपाणी का पूरे प्रकरण पर मानना है कि दारोगा नियुक्ति परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है। परीक्षा से लेकर परिणाम तक पर विवाद है। लिखित परीक्षा के दौरान उत्तर पुस्तिका में कुछ सवालों के जवाब नहीं दिये गये थे। परिणाम घोषित करने में आरक्षण के नियमों का पालन नहीं किया गया। प्रारंभिक परीक्षा में पिछड़ी जाति की एक भी महिला उत्तीर्ण नहीं हुई थी, लेकिन जब मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ, तो उसमें पिछड़ी जाति की 291 महिलाओं के नाम थे। कानून को पूरी तरह ताक पर रख कर दारोगा बहाली प्रक्रिया को अंजाम दिया जा रहा था। दारोगा बहाली के परीक्षा परिणाम पर आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना पर सरकार की ओर से गोलमटोल जवाब ही मिला था। सरकार की ओर से बताया गया कि चयन प्रक्रिया अभी अधूरी है। अंतिम परिणाम आना बाकी है। हालांकि हाईकोर्ट का स्टे बरकरार रहने के बाद भी शारीरिक जांच प्रक्रिया जारी रहेगी। 1717 पदों के लिए पांच अगस्त को मुख्य लिखित परीक्षा का परिणाम घोषित किया गया था। इनमें 10161 अभ्यर्थी सफल घोषित हुए। लिखित परीक्षा में उत्तीर्ण इन अभ्यर्थियों को केवल शारीरिक परीक्षा में पास करना है। अंतिम चयन की सूची इसी आधार पर तय होगी। सरकारी वकील की ओर से ढुलमुल रवैया अपनाने से कोर्ट नाराज है। कोर्ट का मानना है कि इस मामले में सरकार को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त समय मिला है। सरकार को 18 सितम्बर को डिटेल एफेडेविट फाइल करने का आदेश दिया है। कार्ट ने इसी तारीख पर एक साथ सुनवाई करते हुए अंतिम बहस तैयार रहने का आदेश दिया है।

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