तो क्या भाजपा अपनों को मना पायेगी?

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संसदीय क्षेत्र वर्ष 2014 वर्ष 2019वाल्मिीकि नगर सतीश चन्द्र दूबे (भाजपा) वैद्यनाथ प्रसाद महतो (जदयू)गया हरि मांझी (भाजपा) विजय कुमार मांझी ( जदयू)गोपालगंज जनक राम (भाजपा) डॉ. आलोक कुमार सुमन (जदयू)झंझारपुर विरेन्दर कुमार चौधरी (भाजपा) रामप्रीत मंडल (जदयू)सीवान ओमप्रकाश यादव (भाजपा) कविता सिंह (जदयू)नवादा गिरिराज सिंह (भाजपा) चंदन कुमार (लोजपा)

भाजपा के लिए इस बार टिकट की आस लगाए कद्दावर नेताओं को एकजुट रखना चुनौती है। खासकर उन सीटिंग सांसदों को पार्टी से अटूट रखने की चुनौती है जिनका टिकट गठबंधन धर्म की भेंट चढ़ गया। टिकट नहीं मिलने से निराश भाजपा नेताओं के समर्थकों की तरफ से सुगबुआहट भी शुरू हो गई है।ज्ञात हो कि वाल्मीकिनगर से सतीश चन्द्र दूबे, गया से हरि मांझी, झंझारपुर से वीरेन्द्र कुमार चौधरी, सीवान से ओमप्रकाश यादव व गोपालगंज से जनक राम का टिकट कट गया है। साथ ही भाजपा की सीटिंग सीट नवादा भी भाजपा के हाथ से निकल गई है। उधर बांका में टिकट की आश लगाए बैठी पुतुल सिंह को भी निराशा हाथ लगी है। सूत्र बताते हैं कि पुतुल सिंह बांका से निर्दलीय चुनाव लड़ सकती हैं। उनके पति स्व. दिग्विजय सिंह यहां से निर्दलीय चुनाव जीत भी चुके हैं। वरिष्ठ नेता आरके सिन्हा को टिकट नहीं मिलने से उनके समर्थक भी काफी नाराज हैं। सूत्र बताते हैं कि आरके सिन्हा ने चुनाव तक पटना नहीं आने का निर्णय लिया है। वाल्मीकिनगर से भी सतीश चन्द्र दूबे के समर्थक नराज बताए जाते हैं। वाल्मीकिनगर, गया, झंझारपुर, सीवान व गोपालगंज ये पांच सीटें जदयू की खाते में चली गई हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां से भाजपा के उम्मीदवार जीते थे। ये पांचों सांसद खाली हो गए हैं। इन सभी नेताओं को उत्साहित करना एनडीए के शीर्ष नेताओं की जिम्मेवारी है। नवादा सीट से भाजपा की दावेदारी हाथ से निकल तो गई पर केन्द्रीय राज्य मंत्री गिरिराज सिंह को बेगूसराय से टिकट देकर उनके समर्थकों को खुश करने की कोशिश की गई है।

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