तो कोई अतिपिछड़ा बनेगा बिहार बीजेपी का अध्यक्ष!

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बिहार बीजेपी के वर्तमान अध्यक्ष नित्यानंद राय के केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल होने के बाद से ही बिहार में पार्टी के नए अध्यक्ष के नाम पर कयासों का बाजार गर्म है. इसमें कई नाम सामने आ रहे हैं, लेकिन विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से खबर है कि बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व बिहार को लेकर विशेष रणनीति बना रही है.

भविष्य की राजनीति पर फोकस
हालांकि बिहार के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी आम है कि अगला अध्यक्ष किसी सवर्ण को बनाया जाएगा, लेकिन इस थ्योरी में फिलहाल दम नहीं दिख रहा है. इसके दो कारण स्पष्ट रूप से सामने हैं. पहला, बिहार कोटे के केन्द्रीय मंत्रिपरिषद के पांच मंत्रियों में चार सवर्ण जाति से हैं. दूसरा, जेडीयू से बदले हुए रिश्तों के माहौल में किसी पिछड़ा या अति पिछड़ा को ही अध्यक्ष बनाना भाजपा की भविष्य की राजनीति को सूट करता है.

कोई सांसद ही बनेगा अध्यक्ष!
इसके साथ ही एक बड़ा फैक्टर ये है कि पिछले पांच वर्षों में अमित शाह के कालखंड को देखें तो अधिकतर प्रदेशों में किसी सांसद को ही यह जिम्मेदारी दी गई है. ऐसे में बिहार में भी ऐसी ही संभावना जताई जा रही है.

पिछड़ा या अतिपिछड़ा पर BJP लगाएगी दांव
बिहार से जिन सांसदों को अध्यक्ष बनाया जा सकता है इनमें कई नामों की चर्चा है, लेकिन अध्यक्ष कौन बनेगा इसको लेकर कई सवाल भी हैं. विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी सामने आ रही है कि बिहार में अगला अध्यक्ष वही बनेंगे जिनका सामाजिक-राजनीतिक आधार प्रदेश में बीजेपी को और मजबूत करेगा. यही वजह है कि बीजेपी पिछड़े या अतिपिछड़े तबके पर फोकस करने का मन बना रही है.

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रामकृपाल यादव भी रेस में
पिछड़े तबके से आने वाले सांसदों में जिन नामों की चर्चा हो रही है उनमें लालू यादव की बेटी मीसा भारती को हराने वाले सांसद रामकृपाल यादव का नाम चर्चा में है. माना जा रहा है कि अगर भाजपा नेत्तृत्व किसी यादव के नाम पर विचार करेगा तो सहज सुलभ और और जनसरोकारी इस नेता के सर ताज बंध सकता है.

अजय निषाद बन सकते हैं अतिपिछड़ा चेहरा
वहीं अति पिछड़ा वर्ग में मुजफ्फरपुर से सांसद अजय निषाद के नाम पर भी मंथन चल रहा है. दरअसल नदी और जल से जुड़ी हुई जातियों में निषाद, सहनी, बिन्द और गंगोता में भाजपा अभी तक नेतृत्व विकसित नहीं कर पाई है. इन जातियों का बिहार में 7 प्रतिशत आबादी है और ये जेडीयू के वोट बैंक माने जाते हैं.

जाहिर है नीतीश कुमार से तल्ख रिश्तों के बीज भाजपा के लिए इस बार इन जातियों को अपने से जोड़ने का सुनहरा मौका है. इसके अलावा अजय निषाद सांसद भी हैं और लो-प्रोफाइल रहते हैं जिसके कारण उनके नाम पर सहमति बन सकती है.

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राजेंद्र गुप्ता के नाम की चर्चा
अतिपिछड़ा समुदाय से आने वाले राजेन्द्र गुप्ता का नाम भी चर्चा में है, हालांकि वे सांसद नहीं हैं. दरअसल कानू जाति से आने वाले पूर्व विधान पार्षद गुप्ता लंबे समय से पहले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और बाद में भाजपा में विभिन्न पदों पर रहे हैं. भाजपा के नवनियुक्त कार्यकारी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के भी ये करीबी माने जाते हैं.

सवर्ण चेहरों की भी चर्चा
पिछड़े और अतिपिछड़े तबके के बीच जिन सवर्ण नामों की चर्चा हो रही है उनमें राजीव प्रताप रूडी रेस में सबसे आगे दिखते हैं. वे अमित शाह और पीएम मोदी के विश्वासपात्र भी हैं और पीएम मोदी जिस बदलती राजनीति की बात करते हैं उसमें रूडी एक मॉडर्न चेहरा हो सकते हैं.

सिग्रीवाल पर संशय
वहीं जनार्दन प्रसाद सिग्रीवाल का नाम भी चर्चा में है, लेकिन उनपर वित्तीय अनियमितताओं के मामले दर्ज हैं, और वे निगरानी की जांच की जद में हैं. इसलिए बीजेपी उनके नाम को आगे बढ़ाने से पहले कई बार जरूर सोचेगी. ऐसे भी किसी राजपूत का नाम अगर बीजेपी आगे करेगी तो इसमें राजीव प्रताप रूडी की दावेदारी अधिक मजबूत मानी जा रही है.

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राधामोहन के नाम पर असहमति!
तीसरा नाम राधामोहन सिंह का भी है जो मोतिहारी से सांसद हैं. इसबार उन्हें केंद्रीय मंत्रिपरिषद का हिस्सा नहीं बनाया गया, इसलिए उनके नाम की चर्चा जोरों पर है. हालांकि उम्रदराज हो चुके राधामोहन सिंह को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बनाएगी, इसको लेकर भाजपा नेतृत्व के भीतर ही असहमति की खबर है.

हर पहलू पर BJP की नजर
हालांकि मंगल पांडे, राजेंद्र सिंह, राजेंद्र गुप्ता, मिथिलेश तिवारी और प्रेम रंजन पटेल जैसे कई नाम हैं जो चर्चा में तो हैं, लेकिन वे सांसद नहीं हैं. बहरहाल जिस तरीके से पीएम नरेंद्र मोदी के नाम पर बिहार के अतिपिछड़ों ने खुलकर बीजेपी के पक्ष में मतदान किया, बीजेपी इस पहलू पर गहराई से नजर रखे हुए है.

दरअसल बीजेपी को ये पता है कि सवर्ण थोड़े बहुत बिखराव के बावजूद बीजेपी के साथ ही रहेंगे. वहीं सशक्त नेतृत्व के अभाव में यादवों में बिखराव को बीजेपी अवश्यंभावी मान रही है. ऐसे में बिहार में 30 प्रतिशत से अधिक आबादी वाला अति पिछड़ा तबका अगर पार्टी के साथ इंटैक्ट रह जाए तो वह अजेय हो जाएगी. ऐसे में बीजेपी प्रदेश में अतिपिछड़े चेहरे को आगे कर सकती है.

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