तीन दिवसीय शुकराना समारोह का हुआ समापन

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पटना सिटी : दशमेश पिता श्री गुरु गोविंद सिंहजी के 350/351 वें प्रकाशोत्सव के शुकराना समारोह में उनकी जन्मस्थली श्री हरिमंदिरजी पटना साहिब मध्य रात्रि के बाद बोले सो निहाल सतश्री अकाल, बाहो बाहो गोविंद सिंह आपे गुरु चेला के जय घोष के साथ संपन्न हो गया। पुष्प वष्ा, तुमुल ध्वनि और बैंड बाजे की धुन से संपूर्ण मंदिर परिसर और पंडाल गूंज उठा। प्रकाशोत्सव के समय श्री गुरु ग्रंथ साहिब के चल रहे पाठ की समाप्ति हुई। आंखों को चकाचौंध करने वाली खुशनुमा आतिशबाजी का दौर चला। स्थानीय साध-संगत के साथ देश -विदेश के विभिन्न भागों से आये सिख श्रद्धालुओं ने प्रकाशसमय की जन्मकथा का श्रवण किया। रहीरास साहिब के पाठ के बाद आरती, अरदास, हुकुमनामा आदि की नियमित प्रक्रिया संपन्न हुई। जत्थेदार सिंह साहिब ज्ञानी एकबाल सिंह ने गुरु का संदेश और उनके शस्त्रों का दर्शन कराया।

हरिमंदिर जी साहिब में पूरी रात गूंजा वाहो-वाहो

सिखों के पांच तख्तों में दूसरे तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब की खूबसूरती पर देश-दुनिया की नजरें टिकी थीं। बेहद आकर्षक इस गुरुघर को श्रद्धालु जितना देखते उतना ही वह उनके करीब होता जा रहा था। घड़ी में सोमवार की रात बीत चुकी थी। मंगलवार दस्तक दे चुका था। ठंड शबाब पर थी। हर थोड़ी देर पर आसमान से कोहरे की उतरती चादर गुरुद्वारे को अपनी आगोश में समेट लेती। तब दृश्य और भी खुशनुमा होने लगता। धुंध के बीच से झांकती रंग-बिरंगी रोशनी का अक्स तख्त साहिब परिसर में बैठे हजारों श्रद्धालुओं को रौशन कर रहा था। वाहो-वाहो गो¨वद सिंह जी..बोले सो निहाल सत श्री अकाल..की आवाज गूंजती रही। सामने लगे बड़े एलसीडी पर संगत की नजरें टिकी थीं। दरबार साहिब में हो रहे धाíमक कार्यक्रम का लाइव प्रसारण इस पर हो रहा था। जत्थेदार ज्ञानी इकबाल सिंह दशमेश गुरु की जन्म कथा सुना रहे थे। जन्मकथा कीर्तन तख्त श्री हरि मंदिर के हजूरी रागी जत्था भाई जोगेन्द्र सिंह और भाई रजनीश सिंह प्रस्तुत कर रहे थे।

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देर रात 12:45 बजे सीएम ने गुरुघर में प्रवेश किया। संगतों के बीच से होकर वह दरबार हॉल की ओर बढ़े। रास्ते में खड़े सिख संगतों ने 350वें प्रकाशोत्सव के शुकराना एवं 351वें प्रकाशोत्सव के ऐतिहासिक आयोजन के लिए मुख्यमंत्री को लख-लख बधाइयां दी। कहा-ऐसी मेहमान नवाजी न देखी और न सुनी थी। बिहार और यहां के लोग दिल में बस गए हैं। सख्त सुरक्षा घेरे में मुख्यमंत्री दरबार हॉल पहुंचे। यहां जत्थेदार तथा अन्य गणमान्य ने इनका स्वागत किया।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दरबार में बैठ कर दशमेश गुरु की कथा सुनने में मग्न हो गए। तख्त साहिब परिसर तथा चारों ओर बने भवन की सभी मंजिलों पर बैठे और खड़े श्रद्धालु खामोशी से दरबार हॉल की हर एक गतिविधियों पर निगाह टिकाए थे। इस ऐतिहासिक बेला के सभी गवाह बने थे। भक्तों की भीड़ में युवाओं की संख्या अधिक दिखी। छह जनवरी 2017 को इसी दरबार हॉल में 350वें प्रकाशपर्व पर मने दशमेश गुरु के यादगार जन्मोत्सव की चर्चा श्रद्धालुओं के बीच होती रही।

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रह रह कर वाहो-वाहो गो¨वद सिंह जी..का सुमिरन होता रहा। एक साथ हजारों मोबाइल व कैमरों की रोशनी परिसर में चमक रही थी। इंतजार ही इंतजार में वह पल भी आ गया जिसका देश-दुनिया को बेसब्री से इंतजार था। दरबार साहिब में फूलों की वर्षा होने लगी। खूब आतिशबाजी हुई। पंजाब के विशेष बैंड की धुन पर सब झूमने लगे।

बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी सिख संगत को प्रकाशोत्सव की लख-लख बधाइयां दी। श्रद्धालुओं ने उन्हें भी बधाई दी। साढ़े तीन घंटे तक गुरुघर में बैठे मुख्यमंत्री 350वें प्रकाशोत्सव के हर एक ऐतिहासिक क्षण को समेटते रहे। दशमेश गुरु का जन्मोत्सव श्रद्धालुओं के बीच जश्न में तब्दील हो गया। लोग एक-दूसरे के गले मिले। हाथ मिलाया। दिल की गहराइयों से मुबारकबाद दिया। श्रद्धालुओं का अभिवादन स्वीकार करते हुए सीएम गुरुद्वारा परिसर के बाहर निकलने के लिए चल पड़े। घड़ी में 2:57 बज चुका था। हंसते-खिलखिलाते श्रद्धालु गुरुघर से बाहर निकलते रहे। सुबह होने तक जन्मोत्सव का जश्न फिजा में तैर रहा था।

राज्यपाल सत्यपाल मल्लिक ने कहा कि श्री गुरु गोंिवंद सिंहजी महाराज का समस्त व्यक्तित्व एवं कृतित्व संघर्ष, त्याग, बलिदान और मानवता की सेवा की अनुठी कथा है। उनकी जीवन गाथा में धर्म, संस्कृति और स्वदेश की रक्षा के लिए पूरे परिवार को न्यौछावर करने का दुर्लभ दृष्टांत हैं। विदेशी आक्रमणकारियों के भय से त्रस्त समाज को जगाने वाली प्रबल हुंकार गुरु महाराज में थी। ये बातें राज्यपाल ने तख्त हरिमंदिर साहिब के विशेष दीवान में आयोजित शुकराना समारोह में संगत को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने गुरु दरबार में मत्था टेका तथा बिहार के सवरेमुखी विकास एवं राज्यवासियों के सुख समृद्धि की कामनाएं कीं। उन्होंने कहा कि गुरु गोविंद सिंहजी महाराज की वीरता और विद्वतापूर्ण व्यक्तित्व को भारतीय इतिहास में और अधिक समादर मिलना चाहिए। गुरु तेग बहादुर साहिब, गुरु अजरुनदेव साहिब और गुरु गोविंद सिंहजी महाराज जैसे वीर और महान संतों के वीरतापूर्ण व स्वदेश प्रेम से जुड़ी महान कृतियों का भारतीय इतिहास में काफी विस्तार से उल्लेख होना चाहिए। उन्होंने गुरु महाराज की जन्मभूमि बिहार में आये श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए कहा कि आपका इतिहास सदैव स्वदेश प्रेम, कठिन परिश्रम और त्याग का जीता-जागता उदाहरण रहा है। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी सिख परिवार से आती हैं तथा अन्य परिजनों के संबंध सिख परिवारों से है। गुरु गोविंद सिंहजी के दिव्य संदेश पूरी दुनिया के लिएप्रेरणादायक रहे हैं। उन्होंने इस दौरान त्रिभाषिक पत्रिका गोविंद प्रकाश का लोकार्पण भी किया। कार्यक्रम में केन्द्रीय राज्यमंत्री एसएस अहलुवालिया ने भी विचार रखे। इसके पूर्व तख्त साहिब पहुंचने पर प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़, महासचिव सरदार सरजिन्दर सिंह, सहित अन्य लोगों ने राज्यपाल का स्वागत किया। तख्त के जत्थेदार ज्ञानी इकवाल सिंह ने राज्यपाल को सरोपा और कृपाण भेंट किया।

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