तीन तलाक पर पीएम का निर्णय सराहनीय : रजक

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पटना -विधायक श्याम रजक नें केंद्र सरकार द्वारा तीन तलाक के विरुद्ध व मुस्लिम महिलाओं के मेहरम पर लिये गए फैसले का हृदय से स्वागत व अभिनंदन किया है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय के पश्चात मेरे मन व मस्तिस्क में अनायास पूना पैक्ट में गांधी व अम्बेडकर के संवाद व गोलमेज सम्मेलन की वो बात स्वत: कौंधनें लगी है। जिसमें दलितों के सवाल पर बापू नें व कांग्रेसियों नें कहा था कि दलित हिन्दू के अंग हैं अगर अलग से दलितों के निर्वाचन व प्रतिनिधि चुनने का अधिकार मिल जाएगा तो हिंदु में विभक्तिकरण हो जाएगा, जिसे मैं स्वीकार नहीं कर सकता तथा मुस्लिम व ईसाइयों के अधिकार पर सहमति दी थी। मुस्लिम लीग व मोहम्मद जिन्ना भी अम्बेडकर का साथ ना देते हुए मौन हो गए थे।श्री रजक ने कहा कि अम्बेडकर नें कहा था कि चाहे मुगलों का शासन रहा हो या अंग्रेजों का शासन काल हो या यदि सत्ता परिवर्तन भी हो जाए तो दलितों की हालत वैसी ही रहेगी। अत: उन्होंने दलितों के लिए अलग से निर्वाचन की पुरजोर वकालत की थी। भारत को गुलामी से मुक्ति मिली और बाबा साहेब संविधान के निर्माता बने। 1951 से कई सरकारें आयीं और गयीं, परन्तु दलितों के कुछ समस्याएं यथावत रह गयीं और दलित अपने को उपेक्षित महसूस करते रहे। आज केंद्र में एनडीए की सरकार भी है और मुस्लिम महिलाओं के पक्ष में क्रान्तिकारी फैसले लेकर उनकी आकांक्षाओं को साकार करने का काम किया है। तत्पश्चात दलितों की आकांक्षाएं भी पुन: जागृत हुई हैं। क्योंकि आज भी प्रोन्नतिमें आरक्षण का मामला लोकसभा में लंबित है। न्यायपालिका सेवा आयोग के माध्यम से प्रतिभाओं की प्रतियोगिता में दलितों-पिछड़ों को भाग लेने का अवसर, वासगीत अधिकार कानून, छात्रवृत्ति की समस्याएं, निजी क्षेत्रों में आरक्षण का मामला तथा अन्य मामले सरकार के पास विचाराधीन हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी से प्रार्थना होगी कि इस नये वर्ष में दलितों के लंबित समस्याओं का चलते सत्र में निराकरण कर अम्बेडकर के सपनों के भारत का निर्माण कर युग पुरु ष बनें तथा मुख्यमंत्री व दलितों के पीड़ा को हृदय से समझने वाले नीतीश कुमार जी इस पर पहल कर सर्वविदित दलितों के मसीहा के रूप में दलितों के अरमान को पूरा करायें।

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