डेढ़ हजार बरस कलाओं का नियंतण्र केंद्र रहा मगध : सुमन

0
65
Patna-June.2,2018-Suman Kumar Singh is delivering his lecture at Bihar Museum in Patna. Photo by – Sonu Kishan.

वर्तमान बिहार में बात जब ललित कला विशेषकर दृश्यकला की आती है तो हम अपनी स्थिति का आकलन करने लगते हैं। नि:संदेह दो-तीन दशकों में कला के क्षेत्र में गुणात्मक बदलाव आया है। देश के हर बड़े कला आयोजन में बिहारियों ने अपनी गंभीर उपस्थिति दर्ज करायी है। स्थिति सुधरी है लेकिन हम अपनी विरासत से अब भी काफी पीछे हैं। मगध साम्राज्य से लेकर पाल काल तक डेढ़ हजार से अधिक बरस तक यह कला का नियंतण्र केंद्र रहा है। पाल काल के करीब छह सौ बरस के बाद फिर लगता है कला अपनी जड़ की ओर लौट रही है। यह विचार कला समीक्षक और कलाकार सुमन कुमार सिंह ने बिहार संग्रहालय में पालकालीन मूर्तिकला, टेरा कोटा व लघुचित्र विषय पर आयोजित व्याख्यान में रखे।उन्होंने कहा कि ‘‘मगध’ के मायने भी कालखंड के साथ बदलते रहे हैं। कभी मगध साम्राज्य बंगाल-उड़ीसा से लेकर अफगानिस्तान तक फैला हुआ था लेकिन आज हम मगध से आशय बिहार के एक हिस्से से लेते हैं। वहीं, कवि और कला समीक्षक विनोद भारद्वाज ने कंटेम्परी कॉन्टेक्स ऑफ प्रोग्रेसिव आर्ट पर फिल्म दिखाई जिसमें एमएफ हुसैन, रजा, शुजा, तैय्यब मेहता समेत छह दिग्गज कलाकारों मे बारे में दिखाया गया है। श्री भारद्वाज ने इन कलाकारों की खासियत के बारे में लोगों को बताया। इस अवसर पर पूर्व मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री के सलाहकार अंजनी कुमार सिंह, कला शिक्षक राजेंद्र गुप्ता, जितेन कुमार, मनोज कुमार बच्चन, वीरेन्द्र कुमार सिंह सहित अन्य लोग मौजूद थे।

यह भी पढ़े  दिल के मुफ्त ऑपरेशन के लिए एक सौ बच्चे चयनित

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here