ट्रंप को जितने वोट मिले थे, उतना तो हमारा इंक्रीमेंट हो गया

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लोकसभा चुनाव 2019 में बंपर जीत के बाद नरेंद्र मोदी को शनिवार को एनडीए ससंदीय बोर्ड की मीटिंग में गठबंधन का नेता चुना गया. इस दौरान मोदी ने चुनाव में एनडीए की शानदार कामयाबी पर करीब 70 मिनट तक भाषण दिया. कार्यवाहक प्रधानमंत्री ने कहा कि अमेरिका के चुनाव में जितने डोनाल्ड ट्रंप को वोट मिले थे, उतना तो हमारा इनक्रीमेंट हो गया.

पीएम मोदी संसद के केंद्रीय कक्ष में एनडीए के नवनिर्वाचित सांसदों को संबोधित करते हुए ये बातें कही. उन्होंने कहा, ‘2014 में बीजेपी को जितने वोट मिले और 2019 में जो वोट मिले, उनमें जो बढ़ोतरी हुई है. ये करीब-करीब 25 प्रतिशत है.’ मोदी ने कहा, ‘मेरे जीवन के कई पड़ाव रहे, इसलिए मैं इन चीजों को भली-भांति समझता हूं, मैंने इतने चुनाव देखे, हार-जीत सब देखे, लेकिन मैं कह सकता हूं कि मेरे जीवन में 2019 का चुनाव एक प्रकार की तीर्थयात्रा थी.’

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बता दें कि साल 2016 में अमेरिका में हुए राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में रिपब्लिकन पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया था. इलेक्टोरल कॉलेज के कुल 538 वोटों में से ट्रंप को 304 वोट मिले थे. जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी की हिलेरी क्लिंटन को सिर्फ 227 वोट ही मिले. वहीं, 17वीं लोकसभा के चुनाव में बीजेपी को अकेले 303 सीटें मिली, एनडीए की कुल 352 सीटें हैं. 2014 के मुकाबले बीजेपी को इसबार 22 सीटें ज्यादा मिली हैं.

ये दो चीजें एनडीए की अमानत
मोदी ने कहा कि एनडीए के पास दो महत्वपूर्ण चीजें हैं, जो हमारी अमानत है. एक है एनर्जी और दूसरा है सिनर्जी. ये एनर्जी और सिनर्जी एक ऐसा केमिकल है, जिसको लेकर हम सशक्त और सामर्थ्यवान हुए हैं. जिसको लेकर हमें आगे चलना है.

सबका साथ, सबका विश्वास जरूरी
नरेंद्र मोदी ने कहा कि अब सरकार सबका साथ सबका विश्वास से आगे निकल कर तीसरा लक्ष्य जोड़ना चाहती है और वो है सबका विश्वास. मोदी ने कहा कि अब तक गरीबों और अल्पसंख्यकों को पिछली सरकारों ने डराने के अलावा कुछ नहीं किया. इसलिए अल्पसंख्यकों का विश्वास जितना जरूरी है.

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छपास रोग से बचे सांसद
मोदी अपने नेताओं के विवादास्पद बोल के लिए भी खासे परेशान नजर आए. उन्होंने नए चुन कर आये सांसदों को ‘छपास के रोग’ से बच कर रहने को कहा और साथ ही ये भी नसीहत दी कि उन्हें दिल्ली कर दलालों से बचना चाहिए वरना वो ऐसे जाल में फंस जाएंगे जिससे निकलना मुश्किल होगा. शायद इसी का असर था कि बैठक के बाद सेंट्रल हॉल से बाहर आने वाले संसद कैमरा और माइक से बचते नजर आए. साफ निर्देश था कि वीआईपी संस्कृति से बचना होगा ताकि देश की सेवा नि:सवार्थ भाव से हो सके.

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