जेल से रिहा हुए अर्जित शाश्‍वत, इन शर्तों पर मिली है जमानत

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17 मार्च को चंपानगर उपद्रव और जिले में बिना अनुमति नववर्ष का जुलूस निकालने के आरोप में कोर्ट ने केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे के बेटे अर्जित शाश्वत चौबे समेत भाजपा के आठ नेताओं को सशर्त जमानत दे दी है। वे जेल से रिहा हो गए। पीपी सत्यनारायण प्रसाद के मुताबिक 30 दिन तक अर्जित न तो नेतृत्व करेंगे और ना ही कोई जुलूस निकालेंगे।

बता दें कि जमानतदार (बेलर) नहीं मिलने के कारण मंगलवार को बेल बांड नहीं भरा जा सका था। बेल बांड नहीं भरे जाने कारण केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे के पुत्र अर्जित शाश्वत समेत सात आरोपित जेल से बाहर नहीं निकल पाए थे।

बीते 17 मार्च को चंपानगर में हुए उपद्रव और शहर में बिना अनुमति भारतीय नववर्ष के मौके पर जुलूस निकालने के मामले में भाजपा नेता अर्जित शाश्वत, भाजपा महानगर अध्यक्ष अभय कुमार घोष उर्फ सोनू, प्रमोद वर्मा उर्फ पम्मी, निरंजन सिंह, सुरेंद्र पाठक, देव कुमार पांडेय, संजय भट्ट, प्रणव साह उर्फ प्रणव दास को सोमवार को चतुर्थ जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह प्रभारी जिला जज कुमुद रंजन सिंह की अदालत से सशर्त नियमित जमानत (रेगुुलर बेल) मिल गई थी।

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सभी को दस हजार का बेल बांड भरना था। ऐसे में एक आरोपितों को दो जमानतदार की जरूरत है। लेकिन जमानतदार नहीं मिलने के कारण अर्जित समेत किसी भी आरोपितों का बेल बांड नहीं भरा जा सका। बेल बांड नहीं भरने की स्थित में कोई भी आरोपित मंगलवार को जेल से बाहर नहीं निकल सका।

बता दें कि अर्जित शाश्वत ने पटना में 31 मार्च को सरेंडर किया था जिसके बाद उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा दिया गया था। भागलपुर हिंसा मामले में कुल नौ नामजद और पांच सौ से अधिक नामजद अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज है।

मालूम हो कि 31 मार्च की देर रात अर्जित शाश्वत चौबे ने बड़े ही नाटकीय अंदाज में पटना में हनुमान मंदिर के पास सरेंडर किया था जिसके बाद उनके पिता अश्विनी चौबे समेत बिहार बीजेपी के कई नेताओं ने उपद्रव में उन्हें बेवजह फंसाने का आरोप लगाया था।

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