जेपी सेनानियों की देखभाल करेगा जेपी सामाजिक परिवर्तन संस्थान

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PATNA GANDHI SANGHRALIYA MEIN APAT KALEEN SE UTPAN KHTRE AND CHUNOTIYAN PER PAREECHARCHA

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य रविंद्र किशोर सिन्हा ने आपातकाल को देश के इतिहास में सबसे बड़ा काला धब्बा करार दिया। उन्होंने लोकनायक जयप्रकाश सामाजिक परिवर्तन संस्थान की तरफ से जेपी आंदोलनकारियों की देखभाल करने की घोषणा की। एएन सिन्हा इंस्टीटय़ूट में संस्थान की तरफ से बुधवार को आपातकाल पर आयोजित संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए श्री सिन्हा ने कहा कि इमरजेंसी के दौरान उस समय की सरकार ने जिस तरह का अत्याचार किया था वैसा अत्याचार हिटलर और अंग्रेजों ने भी नहीं किया। इमरजेंसी को हर साल याद करना जरूरी है ताकि देश में ऐसी घटना दोहराई नहीं जाए। जेपी आंदोलन की र्चचा करते हुए उन्होंने कहा कि इस आंदोलन में हर विचारधारा और हर वर्ग के व्यक्ति शामिल थे। इस आंदोलन से मार्क्सवादी भी जुड़े थे, भाकपा माले भी, कांग्रेस छोड़ कर आये कुछ नेता भी, अधिवक्ता भी और छात्र भी । बिहार और झारखंड में जेपी के प्रति सरकारी तंत्र के सम्मान की र्चचा करते हुए श्री सिन्हा ने कहा कि आपातकाल के दौरान जेपी को अन्य राज्यों में जिस तरह की यंतण्रा दी गई वैसा अत्याचार प्रशासन के लोगों ने जेपी आन्दोलनकारियों पर इन दोनों राज्यों में नहीं किया। बुजुगोर्ं को भी कमर और हाथों में रस्सा बांधकर सड़क पर घुमाते हुए उस समय कोर्ट ले जाया जाता था। जेपी आंदोलन में जेल जाने वाले आंदोलनकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे आंदोलनकारियों ने सलाखों के पीछे यंतण्रा तो झेली किंतु जो आंदोलनकारी उस समय भूमिगत थे उनकी भूमिका भी बहुत बड़ी है क्योंकि उन्हें भी जेल जाने वालों से कहीं अधिक यातनाएं झेलनी पड़ी थीं। उन्होंने कहा कि 1975 में 16, 17 और 18 जनवरी को छज्जूबाग में हुई बैठक में छात्र आंदोलन करने का निर्णय लिया गया था। 18 मार्च को राजधानी पटना में निकाले गए जुलूस की पृष्ठभूमि की र्चचा करते हुए श्री सिन्हा ने कहा कि जुलूस निकलने के बाद वह स्वयं साइकिल से जनसंघ कार्यालय (आज के भाजपा दफ्तर) पहुंचे जहां पहले से ही जेपी मूवमेंट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले देवदास आप्टे और यशोदानंद मौजूद थे। उन्होंने कहा कि उसी दौरान गोविंदाचार्य का भी वहां आना हुआ। उन्होंने कहा कि यह देवदास आप्टे की सूझ बूझ का परिणाम ही था कि उन्होंने जुलूस के रूप में आ रहे आदोलनकारियों को गिरफ्तार करने के लिए चालू हालत में खड़ी बस को ही भगा लिया था । श्री सिन्हा ने कहा कि 18 मार्च की इस घटना के बाद 5 जून को पटना के गांधी मैदान में जनसैलाब उमड़ पड़ा । श्री सिन्हा ने कहा कि देश में चल रहे आंदोलन के बीच इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जगमोहन लाल सिन्हा ने राजनारायण को विजयी घोषित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस दिन इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेा को बहाल रखते हुए अपने आदेश में कहा कि इंदिरा गांधी सांसद नहीं हो सकती और 6 साल तक वह चुनाव नहीं लड़ सकती। श्री सिन्हा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद दिल्ली के रामलीला मैदान में 25 जून को जेपी ने एक मीटिंग की जिसमें अटल बिहारी वाजपेयी (पूर्व प्रधानमंत्री), लालकृष्ण आडवाणी (पूर्व उप प्रधानमंत्री), मधु लिमए, राजनारायण जैसे नेता शामिल हुए। तभी तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किसी की भी सलाह नहीं मानते हुए सिद्धार्थ शंकर राय से आपातकाल संबंधी मसौदा तैयार कराया और 25 जून की आधी रात को तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद से उस पर हस्ताक्षर कराने के बाद देश में इमरजेंसी लागू करने की घोषणा कर दी । आपातकाल में प्रेस पर लगे सेंसर के दौरान लोगों तक समाचार पहुंचाने की उन पर आई जिम्मेदारी की र्चचा करते हुए श्री सिन्हा ने कहा कि पूरे देश से सूचनाओं को एकत्रित कर संपादक भानु प्रताप शुक्ल प्रतिदिन एक बुलेटिन निकालते थे । इस बुलेटिन को साइक्लोस्टाइल कर सब जगह भेजने की जिम्मेदारी मेरी थी।

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