जाने-माने साहित्यकार व कवि 91 वर्षीय बलभद्र कल्याण का निधन

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पटना : जाने-माने साहित्यकार व कवि 91 वर्षीय बलभद्र कल्याण का निधन सोमवार की देर रात हो गया। उनकी अत्येष्ठि मंगलवार को स्थानीय गुलबी घाट पर संपन्न हुई। मुखाग्नि पुत्र सुमन कुमार ने दी। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में कवि, साहित्यकार एवं समाज के गणमान्य लोग शामिल हुए और उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके निधन से साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

सांसद आरके सिन्हा ने कहा कि स्व. कल्याण की कमी बिहार ही नहीं, देश के साहित्य जगत में खलेगी। वरिष्ठ पत्रकार व रंगकर्मी विश्वनाथ शुक्ल चंचल ने कहा कि दर्जनों पुस्तकों के लेखन, आकाशवाशी और पटना दूरदर्शन से जुड़े स्व. कल्याण का होली पर आयोजित होने वाले महामूर्ख सम्मेलन में योगदान नहीं भुलाया जा सकता। उनके निधन से कला-संस्कृति जगत में सूनापन आ गया है।

जाकिर हुसैन संस्थान के महानिदेशक डॉ. यूके सिंह ने उनके निधन को अपनी व्यक्तिगत क्षति बताई। सुरेन्द्र प्रताप सिंह पत्रकारिता संस्थान के निदेशक डॉ. समीर कुमार सिंह, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ, प्रो. लक्ष्मी सिंह समेत अन्य साहित्यकारों-कवियों ने शोक व्यक्त करते हुए अपूरणीय क्षति बताया।

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हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष अनिल सुलभ, वरीय उपाध्यक्ष नृपेंद्र नाथ गुप्त, साहित्य मंत्री डॉ. शिववंश पांडेय, स्थानीय विधायक संजीव चौरसिया, योगेन्द्र प्रसाद मिश्र, शांति ओझा आदि ने बलभद्र कल्याण के आवास पर जाकर शोक प्रकट किया तथा परिजनों को ढाढस बंधाया। उधर, आज संध्या साहित्य सम्मेलन में शोक-सभा आयोजित कर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि दी गई।

शोकसभा में अनिल सुलभ ने कहा कि बलभद्र कल्याण का निधन हिंदी के एक बड़े नक्षत्र के डूब जाने के समान है। डॉ. कुमार वीरेंद्र, शिववंश पांडेय, देवेंद्र देव, डॉ. मधु वर्मा, डा मेहता नगेंद्र सिंह, आचार्य आनंद किशोर शास्त्री, पं. गणोश झा, राज कुमार प्रेमी, शायर रमेश कंवल, आरपी घायल, नरेंद्र देव, कृष्ण रंजन सिंह, डॉ. अर्चना त्रिपाठी, विजय गुंजन, राजन सिन्हा, पूनम आनंद, सागरिका राय, सरोज तिवारी, सत्येंद्र कुमार पाठक, अनुपमा नाथ सुमेधा पाठक, लता प्रासर, आराधना प्रसाद आदि ने श्रद्धांजलि दी। डा मँजुला, डा सीमा यादव, शालिनी पाण्डेय समेत बड़ी संख्या में साहित्य-सेवी एवं प्रबुद्ध जन उपस्थित थे।

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सम्मेलन के वयोवृद्ध प्रधानमंत्री आचार्य श्रीरंजन सूरिदेव, कवि मृत्युंजय मिश्र करुणोश तथा पं शिवदत्त मिश्र ने भी शोक-संदेश भिजवाए। सभा के अंत में दो मिनट मौन रहकर स्वर्गीय पुण्यात्मा की शांति के लिए ईर से प्रार्थना की गई।

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