जलवायु के अनुसार विकसित की जाएं कृषि पण्रालियां : प्रेम

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राज्य के कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि राज्य के प्रत्येक जिले की अलग-अलग कृषि जलवायु पारिस्थितिकी है। इसलिए यह आवश्यक है कि प्रत्येक जिले के जलवायु के अनुसार कृषि कार्य, पशुधन तथा कृषि पण्रालियों को विकसित करने के लिए उस जिले के संसाधन की उपलब्धता, सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति, बाजार की व्यवस्था उपादान उपलब्ध कराने वाले केन्द्रों की संख्या तथा अन्य सेवा सुविधाओं के अनुसार सामरिक अनुसंधान एवं विस्तार योजना तैयार की जाये। डॉ. कुमार आज बामेती के सभागार में सामरिक अनुसंधान एवं विस्तार योजना (एसआरईपी) से संबंधित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि एसआरईपी को तैयार करने में प्रत्येक जिले के कृषि पण्राली की विशेषता अथवा अभिनवता की पहचान कर उस जिला में कृषि के विविधिकरण पर विशेष बल दिया जाना चाहिए। इसके फलस्वरूप किसानों की आय में वृद्धि होना चाहिए। कृषक समूहों और संगठनों के माध्यम से बाजार, प्रौद्योगिकियों और संसाधनों तक कृषकों की पहुंच में वृद्धि की जानी चाहिए। वर्तमान कृषि पण्रालियों में प्रौद्योगिकीय खामियों का निवारण करने के लिए किसानों के खेतों पर ही प्रौद्योगिकी विकास, परीक्षण और परिष्करण किया जाना चाहिए। प्रत्येक कृषि जलवायु प्रक्षेत्र के अंतर्गत ही सतत् उत्पादन पण्रालियों का निर्माण और अनुरक्षण करने के लिए उपयुक्त प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन योजना को प्रोत्साहित करना चाहिए। डॉ. कुमार ने कहा कि इसके लिए कृषि एवं संबद्ध विभागों के पदाधिकारियों, वैज्ञानिकों, प्रसार कार्यकर्ताओं तथा किसानों की सहायता से से ही एसआरईपी का निर्माण किया जाता है। आत्मा योजना के सफल कार्यान्वयन हेतु एसआरईपी का निर्माण पूर्व में किया गया था जिसके आधार पर अबतक योजना के अधीन सभी संबंधि कायरे को किया जा रहा है। परन्तु जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए इसके नए सिरे से पुन: निर्माण की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि एसआरईपी के आधार पर ही प्रक्षेत्र विशेष के लिए चयनित फसल हेतु प्रत्यक्षण एवं संबंधित फसल विशेष पर तकनीकी प्रशिक्षण, किसान पाठशाला, किसान गोष्ठी एवं किसान वैज्ञानिक वार्तालाप सहित अनेक प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन आत्मा योजना के माध्यम से राज्य, जिला, प्रखंड एवं पंचायत स्तर पर सरकार द्वारा समसामयिक कराया जाता है। मौके पर डॉ. आरके सोहाने, निदेशक, प्रसार शिक्षा, डॉ. जितेन्द्र प्रसाद, निदेशक, बामेती, अनिल कुमार झा, उप निदेशक (शष्य), शिक्षा सहित सभी जिला परियोजना निदेशक, आत्मा तथा कृषि विज्ञान केन्द्रों के वरीय वैज्ञानिक-सह-प्रधान उपस्थित थे।

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