जर्मनी में चौथी बार चांसलर बनेंगी एंजेला मर्केल

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बर्लिन :जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल लगातार चौथी बार चुनाव जीत गई हैं, लेकिन गठबंधन सरकार गठित करने के लिए अब उनको काफी जद्दोजहद करनी पड़ेगी क्योंकि उनसे बहुत सारे मतदाता छिटक गए और उन्हें नए साझेदार बनाने होंगे। मर्केल के लिए एक और चुनौती यह भी है कि प्रवासी विरोधी पार्टी एएफडी पहली बार जर्मन संसद के निचले सदन बुनडेसटैग में पहुंच रही है। इस बार मर्केल की कंजर्वेटिव पार्टी और मध्य-वाम सोशल डेमोक्रेट दोनों कमजोर हुए। दोनों के लिए दशकों में ये नतीजे काफी खराब हैं। सोशल डेमोक्रेट के नेता मार्टिन सेल्ज ने अपनी पार्टी की हार स्वीकारी है। सेल्ज ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी विपक्ष में रहेगी। इससे पहले उनकी पार्टी मर्केल की अगुवाई वाली गठबंधन सरकार में शामिल है। मर्केल ने कहा, हमें नई सरकार बनाने का जनादेश मिला है और हमारे खिलाफ कोई दूसरी सरकार नहीं बन सकती। उन्होंने कहा, मौजूदा समय में हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अस्थिर समय में रह रहे हैं। मेरा इरादा जर्मनी में एक स्थिर सरकार बनाने का है। स्थिरता और निरंतरता के वादे पर बीते 12 वर्षो से चल रहे मर्केल के सीडीयूासीएसयू ब्लॉक को 32.9 फीसद मत मिले जबकि मार्टिन सेल्ज की सोशल डेमोक्रेट्स को 20.8 फीसदी मत मिले। इस्लाम विरोधी दल अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (एएफडी) 13 फीसद मतों के साथ तीसरा सबसे बड़ा दल बना। इस दल ने मर्केल की आव्रजन और शरणार्थी संबंधी नीति को लेकर उनका विरोध करने का संकल्प जताया। बुनडेस्टैग में धुर-दक्षिणपंथी राष्ट्रवादी दर्जनों सांसदों के प्रवेश के साथ द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद के जर्मनी में एक ठहराव खत्म हुआ है जिसे वहां के एक बड़े अखबार बिल्ड ने राजनीतिक तूफान करार दिया है।अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी के एलेक्जेंडर गॉलैंड ने कहा, हम अपना देश वापस लेंगे। हालांकि अन्य दलों ने एएफडी के साथ मिलकर काम करने की संभावना से इनकार कर दिया है। एएफडी के नेताओं ने मर्केल को देशद्रोही बताया जिसकी वजह यह है कि मर्केल ने वर्ष 2015 से दस लाख शरणार्थियों को प्रवेश की इजाजत दी है।

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