‘‘जब शहर हमारा सोता है’का मंचन

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पटना – उजला ही उजला शहर होगा, जिसमें हम-तुम बनायेंगे घर। दोनों रहेंगे कबूतर-से, जिसमें होगा ना बाजों का डर.. यह पंक्ति कालिदास रंगालय में सुनने को मिली। मौका था इप्टा के तत्वावधान में चल रहे छह दिवसीय इप्टा युवा नाटय़ उत्सव के तीसरे दिन का। नाटय़ोत्सव में शुक्रवार को पियूष मिश्रा लिखित और दीपक कुमार के निर्देशन में नाटक ‘‘जब शहर हमारा सोता है’ का मंचन किया गया। नाटक के माध्यम से देश में होने वाले दंगों के कारणों को दिखाया गया। नाटक में उजाले की उम्मीद है, प्यार है और इंसानी रिश्तों के तार-तार होती भावनाओं की आह को दिखाया गया। नाटक में निर्भय त्रिगुण, सूरज पांडेय, अखिल मल्होत्रा, समता कुमार, प्रभात कुमार, अभिमन्यु कुमार, बबुआ बब्बल, चंदन प्रभात, रवि कुमार, रंजीत रॉक, गुलशन कुमार, अमित आर्यन, निखिल आनंद, संजय कुमार, टीपू सुल्तान, उमाकांत निराला, सोमनाथ दत्त, प्रियंका कुमारी, सुष्मिता रानी, आर्या कुमारी आदि ने अभिनय किया। नाटक से पूर्व रंग चबूतरा पर कवयित्री नताशा ने बिहार की पीड़ा को दर्शाती ‘‘मैं और हम’ और ‘‘पाटलिपुत्र का अगमकुंआ’ कविता पढ़ी जिसका दर्शकों ने भरपूर ताली बजाकर स्वागत किया। इसके साथ ‘‘देह और तुम’, ‘‘आत्महत्या’ और ‘‘नींद’ शीर्षक कविताएं सुनायीं।

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