जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन तेज करने का आह्वान

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पटना – माकपा के राज्य सचिव अवधेश कुमार सिंह ने केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह के बयान को असंवेदशील करार दिया है। बयान हताशा एवं मानसिक दिवालियेपन का द्योतक है। उन्होंने रविवार को बयान जारी कर कहा कि कृषि एवं किसान विरोधी नीतियों को लागू करने का परिणाम है कि लगातार देश में किसानों की आत्महत्या का प्रतिशत बढ़ता जा रहा है। कृषि लागत का लगातार बढ़ता जाना एवं कथित समर्थन मूल्य तथा सरकारी क्रय की नगण्य व्यवस्था तथा बिचौलियों के हाथों कौड़ी के मूल्य अपने उत्पादन को बेचने की मजबूरी और गंभीर महाजनी कर्ज में डूबने के चलते किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। बिहार में भी लगातार किसानों की दुर्दशा बढ़ती जा रही है। कोशी सहित बिहार के मक्का किसानों की स्थिति गंभीर है। गेहूं की पैदावार तो हुई पर उसके सरकारी खरीद की आज कहीं कोई व्यवस्था नहीं हुई। दलहन के मुख्य क्षेत्र मोकामा टाल का न तो कोई समुचित विकास हुआ न दलहन के उचित खरीद की कोई व्यवस्था है। परिणामस्वरूप किसान आंदोलन को मजबूर है। केन्द्र की सरकार हो या बिहार सरकार दोनों ही लफ्फाजी भरे घोषणाओं तक ही सीमित हैं।माकपा राज्य सचिव ने कहा कि राधामोहनंिसंह ने जो लम्बा-चौड़ा विकास का आंकड़ा पेश किया है। वो सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी के अलावा कुछ भी नहीं है। इसका सरजमीं एवं सत्यता से कोई मेल नहीं है। ये सिर्फ झूठ का पुलिंदा भर है। कृषि मंत्री के द्वारा पेश किया गया विकास का आंकड़ा दोनों सरकारों द्वारा अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए विज्ञापन एवं झूठे प्रचार के जरिये आमलोगों को भ्रमित करने की कड़ी भर है। माकपा राज्य सचिव ने कहा कि इनके चार साल के शासन में बरसों से हासिल अधिकारों को छीना गया है तथा मजदूर किसान के इस देश को कारपोरेट को सौंप दिया गया है। आत्महत्या करते किसानों को लाभदायक मूल्य और कर्ज माफी को नकार कर कारपोरेट लुटेरों को लाखो-करोड़ रुपये की छूट दी गई है। आमलोगों के भूमि, आवास, भोजन,ािक्षा, स्वास्य, रोजगार और पेंशन अधिकार छीने गये हैं। दलितों, आदिवासियों,महिलाओं पर अनंतहीन जुर्म ढाये जा रहे हैं। इनके इसी जनविरोधी चरित्र को पहचान कर देश एवं बिहार के किसानों एवं आमलोगों ने आंदोलन शुरू किया है। उन्होंने कहा कि देश एवं बिहार के किसानों आंदोलन की राह पर है। बिहार में मक्का किसानों, गन्न, दुग्ध, उत्पादकों ने आंदोलन का शंखनाद किया तो मोकामा के दलहन किसानों ने इसमें मजबूती प्रदान की आज देश में अपनी गिरती साख और लगातार हो रही हार से बौखला कर ये गाली-गलौज की भाषा पर उतर चुके हैं। उन्होंने पार्टी की सभी इकाइयों से केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन तेज करने का आह्वान किया है।

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