जनता के लिए पद क्या चीज है: कुशवाहा

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राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी) के चीफ उपेन्द्र कुशवाहा ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. कुशवाहा बिहार की नीतीश सरकार के खिलाफ धरने और उपवास पर बैठ गए हैं. मोदी सरकार में मंत्री कुशवाहा यह धरना बिहार सरकार द्वारा केंद्रीय विद्यालय के लिए कथित तौर पर ज़मीन नहीं दिए जाने के विरोध में दे रहे हैं.

वह अपने लोकसभा क्षेत्र काराकाट में धरने पर बैठे हैं. धरने के दौरान उन्होंने एबीपी न्यूज़ से बातचीत करते हुए मंत्री पद से इस्तीफा देने के भी संकेत दिए. उनसे जब एबीपी न्यूज़ ने इस्तीफ़े पर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि अपने लोक सभा क्षेत्र में आया हूं. यहां लोगों की भावनाएं समझूंगा, मंत्री पद क्या चीज़ है?

मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा के मुताबिक, औरंगाबाद जिले में नीतीश सरकार ने केंद्रीय विद्यालय के लिए जमीन नहीं उपलब्ध कराई. इसी बात को लेकर आरएलएसपी सुप्रीमो कुशवाहा नाराज हैं और उन्होंने शुक्रवार को ही धरना देने की बात की थी. धरने को लेकर कुशवाहा की पार्टी आरएलएसपी ने पोस्टर भी जारी किया है. इस पोस्टर के माध्यम से लोगों से धरने में शामिल होने की अपील की गई है.

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दरअसल, बिहार की सियासत इन दिनों दिलचस्प दौड़ से गुजर रही है. उपेंद्र कुशवाहा को लेकर ये कयास लगाए जा रहे हैं कि वे एनडीए का साथ छोड़ सकते हैं. हालांकि उन्होंने इस तरह का कोई एलान नहीं किया है, लेकिन जेडीयू के साथ-साथ वे बीजेपी पर भी निशाना साध रहे हैं. गुरुवार को मोतिहारी में पार्टी के खुले अधिवेशन में उन्होंने कहा कि ‘अब याचना, नहीं रण होगा.’ उन्होंने कहा कि मंत्री पद से बर्खास्त करने का अधिकार सिर्फ प्रधानमंत्री के पास है. इससे पहले उन्होंने कहा था कि अगले लोकसभा चुनाव तक वे मंत्री पद पर बने रहेंगे.

ऐसे में जब कुशवाहा एनडीए से अलग नहीं हुए हैं और बीजेपी-जेडीयू दोनों पर निशाना भी साध रहे हैं, इसको लेकर सहयोगी दल नाराज हैं. दरअसल, कुशवाहा की सारी नाराजगी सीटों की संख्या को लेकर है. एनडीए में फिलहाल सीटों की संख्या का कोई आधिकारिक एलान नहीं हुआ है लेकिन कहा जा रहा है कि कुशवाहा को दो से ज्यादा सीटें नहीं मिलेगी और ये उन्हें मंजूर नहीं है.

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