जदयू के लिए लोकसभा का दूसरा चरण काफी महत्वपूर्ण

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लोकसभा के प्रथम चरण के चुनाव में ग्राउंड लेवल पर जनता का मिजाज समझने वाले जदयू के लिए लोकसभा का दूसरा चरण काफी महत्वपूर्ण है। यह फेज उन लोकसभा क्षेत्रों के चुनाव का है जहां पांच में चार पर महागठबंधन के दलों का कब्जा है। इसलिए जदयू के लिए अपनी जीती हुई सीट को बचाने से लेकर महागठबंधन की जीती हुई सीटों को हासिल करना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। ज्ञात हो कि 18 अप्रैल को होने वाले चुनाव में राजग की ओर से जदयू पांचों लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ रहा है। जदयू के लिए दूसरे चरण का चुनाव प्रतिष्ठा से जुड़ा है। इस चरण में पूर्व की जीती हुई पूर्णिया लोकसभा सीट हासिल करने के साथ कांग्रेस के हाथों से किशनगंज व कटिहार तथा राजद के हाथों से भागलपुर व बांका लोकसभा सीट छीननी भी है। वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव की स्थिति यह थी कि पूर्णिया पर जदयू के संतोष कुशवाहा का कब्जा रहा वहीं किशनगंज से मो. असरारुल हक तथा कटिहार से तारिक अनवर को जीत मिली थी। बांका व भागलपुर से राजद के उम्मीदवार क्रमश: जयप्रकाश यादव व बुलो मंडल ने जीत दर्ज की थी। किशनगंज लोकसभा से जदयू ने महमूद अशरफ को उतारा है। इनका मुकावला इस बार कांग्रेस के मो. जावेद से है। गत लोकसभा चुनाव में मोहम्मद असरारुल हक ने भाजपा के दिलीप जायसवाल को हराया था। तब जदयू से अख्तरउल इमाम खड़े हुए थे। मगर वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में जदयू ने अपना उम्मीदवार बदल दिया है। गत चुनाव में यहां से रनर रही भाजपा अब राजग के सदस्य जदयू के साथ है। कटिहार लोकसभा से राजग की तरफ से जदयू के दुलालचंद गोस्वामी को चुनावी जंग में उतारा गया है। इनका मुकाबला कांग्रेस के तारिक अनवर से है। वर्ष 2004 के चुनाव में तारिक अनवर राकांपा से चुनाव लड़े थे। तब यहां से भाजपा के उम्मीदवार निखिल कुमार रनर रहे थे। उस वक्त जदयू की तरफ से रामप्रकाश महतो ने चुनाव को त्रिकोणात्मक बनाया था। इस बार बदली हुई स्थिति यह है कि जदयू ने अपने उम्मीदवार बदल डाले हैं और गत चुनाव के विजेता तारिक अनवर कांग्रेस की तरफ से खम ठोकरहे हैं। गत चुनाव में रनर रही भाजपा इस चुनाव में जदयू के उम्मीदवार के लिए जीत का जज्वा जगा रही है। पूर्णिया लोकसभा जदयू की सीटिंग सीट है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां से संतोष कुशवाहा ने जीत का परचम लहराया था। तब भाजपा के उम्मीदवार उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह रनर रहे थे। तब कांग्रेस के अमरनाथ तिवारी ने चुनाव को त्रिकोणात्मक संघर्ष में डाला था। इस बार की बदली हुई स्थिति यह है कि भाजपा के उम्मीदवार रहे उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में महागठबंधन की तरफ से कांग्रेस की टिकट पर खम ठोक रहे हैं। बांका लोकसभा क्षेत्र में त्रिकोणात्मक संघर्ष में जा फंसा है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में राजद ने एक बार फिर जयप्रकाश यादव को महागठबंधन का उम्मीदवार बनाया है। जदयू ने राजग की ओर से गिरधारी यादव को चुनावी जंग में उतारा है। गिरधारी यादव 1996 में सांसद रह चुके हैं। मगर भाजपा समर्थित उम्मीदवार पुतुल सिंह को जदयू से टिकट नहीं मिलने के कारण वे निर्दलीय लोकसभा चुनाव में उतर कर चुनाव को त्रिकोणात्मक संघर्ष की ओर ले चली हैं। भागलपुर लोकसभा क्षेत्र से वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में महागठबंधन ने एक बार फिर राजद के शैलेश कुमार उर्फ बूलो मंडल को चुनावी जंग में उतारा है। राजग की ओर से जदयू ने यहां अजय मंडल को उतारा है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में राजद के बूलो मंडल ने भाजपा के शाहनवाज हुसैन को हराया था। तब जदयू के अबु कैसर ने चुनाव को त्रिकोणात्मक बनाया था। इस चुनाव में राजद उम्मीदवार श्री मंडल ने भाजपा उम्मीदवार श्री हुसैन को लगभग नौ हजार मतों से हराया था। तब जदयू के अबु कैसर को 1.32 लाख से ज्यादा मत मिले थे। इस बार के संघर्ष की स्थिति बदली हुई है। बुलो मंडल की सीधी टक्कर जदयू के अजय मंडल से है।

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