जदयू के दही चूड़ा भोज में पहुंचे अशोक चौधरी

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बिहार में मकर संक्रांति के मौके पर जदयू द्वारा आयोजित दही-चूड़ा भोज में पहुंचे प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष अशोक चौधरी ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि राजनीति में कोई पूर्णविराम या शुरूआत नहीं होता है। मेरा व्‍यक्तिगत संबंध था, इसलिए जदयू के भोज में शामिल होने आया।

दरअसल, मकर संक्रांति के अवसर पर बिहार में इस बार जहां राजग के घटक दलों के नेता सियासी चूड़ा-दही भोज का आयोजन कर रहे हैं तो विपक्षी महागठबंधन में सन्‍नाटा पसरा है। जदयू व भाजपा के नेता पांच साल बाद एक दूसरे के भोज में शामिल हुए। जदयू प्रदेश अध्‍यक्ष वशिष्‍ठ नारायण सिंह के भोज में राजद और कांग्रेस के नेताओं को नहीं देखा गया। लेकिन इस बची कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्‍यक्ष अशोक चौधरी के शामिल होने से एक बार फिर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है।

कांग्रेस के प्रदेश कार्यकारी अध्‍यक्ष कौकब कादरी ने कहा कि जदयू ने चूड़ा-दही भोज में पार्टी के नेताओं को नहीं बुलाकर अपनी संर्कीण मानसिकता का परिचय दिया है। इससे यह साफ हो गया है कि जदयू मौका परस्‍त है।

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वहीं अशोक चौधरी के जदयू के भोज में शामिल होने के बाद यह कहा जाने लगा है कि भले ही नीतीश कुमार और उनकी पार्टी महागठबंधन से अलग हो गई है। लेकिन अशोक चौधरी का प्रेम अभी भी जदयू के लिए बना हुआ है। यह पहली बार नहीं है, जब इस तरह की कोई बात हुई हो। पटना विश्‍वविद्यालय के शताब्‍दी समारोह के दौरान भी मंच से नीतीश कुमार ने अशोक चौधरी का नाम लिया था।

साथ ही मकर संक्रांति से एक दिन पहले 13 जनवरी को कांग्रेस नेता सदानंद सिंह के आवास पर पार्टी नेताओं की बैठक में भी अशोक चौधरी नहीं पहुंचे थे। कुछ समय पहले भी ऐसे घटनाक्रम सामने आये थे, जिससे यह लग रहा था कि अशोक चौधरी का नीतीश कुमार और उनकी पार्टी की ओर झुकाव है। जिस तरह से ये सियासी घटनाएं सामने आ रही है, कयास लगाये जा रहे हैं कि बिहार की राजनीति में एक बड़ा फेरबदल हो सकता है।

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