जदयू का तंज :2015 की करारी हार भूल गयी भाजपा

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जदयू और भाजपा के बीच तलवारें खींच गई हैं। दोनों दल के नेता एक-दूसरे को नीचा दिखाने में जुटे हैं। भाजपा के कई नेताओं ने कहा है कि बिहार में नीतीश मॉडल पर नहीं बल्कि लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी के चेहरे पर जनता ने वोट किया था। जदयू नेता इसे पचा नहीं पा रहे हैं। नीतीश की पार्टी के नेताओं को लगता है कि बिहार में मोदी के चेहरे पर नहीं बल्कि नीतीश के विकास मडल की वजह से 40 में से 39 सीटें एनडीए को मिलीं हैं। भाजपा नेताओं ने आज एक बार फिर से जदयू पर अटैक किया था। इसके जवाब में जदयू ने भी बीजेपी पर सीधा हमला बोला है। जदयू के मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह ने बीजेपी को 2015 विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त की याद दिलाई है। संजय सिंह ने ट्विट कर कहा कि जो लोग आज नीतीश कुमार पर बयान देकर खुद की तरफ अटेंशन चाहते हैं उन्हें याद रखना चाहिए कि 2015 में बारात दरवाजे तक पहुंचे बिना वापस लौट गई थी। शादी करने निकले थे और मातम में डेढ़ साल तक छाती पीटनी पड़ी। उन्होंने कहा कि इन लोगों की स्थिति वैसी ही है जैसी शादी में पहुंचे बारातियों की होती है। शादी दूल्हे की होती है और बाराती अपनी धुन में नाचते रहते हैं। दूल्हे के बिना बारात निकलती है क्या और जहां केवल बारातियों की भीड़ हो वहां दूल्हा कौन बनेगा। संजय सिंह ने कहा कि लोक लज्जा होती तो बेफजूल ज्ञान नहीं देते। आज नाच गाकर जो ड्रामेबाजी कर रहे हैं वह अवसर भी नीतीश कुमार की वजह से मिला है। इसलिए खूब नाचिए लेकिन इतना ख्याल रहे कि बिना दूल्हे के बारात को कोई नहीं पूछता। उन्होंने कहा कि आजकल जनाधार विहीन अप्रवासी नेताओं का प्रवचन सुनने को मिल रहा है। अस्तित्व संकट से जूझ रहे नेताओं को ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बारे में टिप्पणी कर उन्हें थोड़े वक्त के लिए सबका ध्यान अपनी तरफ खींचने में सफलता मिल जाएगी।

जनता दल यूनाइटेड के विधान पार्षद प्रो. रणबीर नंदन ने कहा कि भाजपा अगर आज बिहार की सत्ता तक पहुंच सकी है तो इसके पीछे उसके वो नेता नहीं हैं जो अनर्गल बयान देते रहते हैं बल्कि भाजपा सत्ता तक समाजवाद की राह अपना कर पहुंच सकी है। बिहार में बांट कर नहीं, जोड़ने की राजनीति ही जनता को भाती है और यही कारण है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कोई विकल्प नहीं है। प्रो. नंदन ने कहा कि भाजपा के वैसे नेता जो नीतीश कुमार के विरोध में वक्तव्य देते हैं जान लें कि बिना समाजवादियों के भाजपा कभी सत्ता तक नहीं पहुंच सकी। 1967 की संविद सरकार हो या 1977, 2005 और 2010 का विधान सभा चुनाव। समाजवाद की सीढ़ी चढ़ कर ही भाजपा सत्ता तक पहुंची। 2015 के विधान सभा चुनाव में जब भाजपा को मुगालता हुआ तो भाजपा का सीधे सफाया हो गया था। वैसे भी राजग के किसी भी दल में नीतीश कुमार जैसा न तो कोई चेहरा है और न कोई विजन वाला व्यक्तित्व। ईमानदारी के साथ विकास के अद्भुत विजन के कारण देश के चेहरा बने हैं, जिसकी भाजपा नेताओं ने पुष्टि करते उन्हें पीएम मेटेरियल तक कहा है। ऐसे में भाजपा नेताओं को नीतीश कुमार का विरोध करने का नैतिक अधिकार नहीं है। प्रो नंदन ने इस बाबत भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से ऐसे बयानवीरों से जिन्हें न तो राज्य की राजनीति की समझ है और न ही उनका कोई जनाधार है। पर लगाम लगाने की मांग की।

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