चौथा अंतरराष्ट्रीय धर्मा-धम्मा सम्मेलन : नीतीश ने की राजगीर को वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल करने की मांग

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बिहार में राजगीर के अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन हॉल में गुरुवार से चौथा अंतरराष्ट्रीय धर्मा-धम्मा सम्मेलन शुरू हो गया. तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किया.

सम्मेलन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि भारत के सभ्यता संस्कृति व विकास की गति में बिहार ने अहम भूमिका का निर्वाह किया है। वहीं बिहार के कई धर्म निरपेक्ष महापुरुषों ने अपने योगदान से विश्व बंधुत्व का प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रुप से संदेश प्रसारित कर विश्व भर में सहिष्णुता का मार्ग प्रशस्त किया है। ऐसे में बिहार के नालंदा स्थित राजगीर मे एक कंफ्लिक्ट रेसोल्यूशन सेंटर के रूप में स्थापना होने से वैश्विक विवादों को सुलझाने का केंद्र हो। जहां सभी तरह के विवादों का निपटारा राजगीर में हो। ताकि विश्व धरोहर व विश्व गुरु के परिचायक रहे नालंदा की धरती से विश्व कुटुम्बकम का संदेश पूरे दुनिया में प्रसारित हो। उक्त संबोधन से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर के सभागार में मंचासीन राष्ट्रपति व अन्य का ध्यान आकृष्ट कराते हुए बिहार, नालंदा व राजगीर के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समृद्धिशाली व गौरवशाली मगध साम्राज्य के इतिहास बिहार से चहुंओर विस्तार हुआ। वहीं इस काल मे भगवान बुद्ध के संदेश का डंका भारत के कई स्थानों से लेकर विदेशों तक प्रसारित हुआ। उन्होंने अपने उद्गार में बिहार के इतिहास प्रेम व सूबे का विकास निहित भाव प्रकट हुए। जिसमें उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध के अतिप्रिय स्थानों में राजगीर ही एकमात्र ऐसा पवित्र स्थान है। जहां भगवान बुद्ध के चरण उनके ज्ञान प्राप्ति के पूर्व व ज्ञान प्राप्ति के पश्चात पड़े थे। उन्होंने निर्माणाधीन अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय को अपने सपनों के बिहार में राजगीर के पंच पहाड़ियों के बीच प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के अतीत के गौरव की पुन: वापसी का प्रतीक बताया। कहा कि भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम साहब ने हमारे उस सपने को पुनर्जीवित व हकीकत में साकार करने में सहयोग प्रदान किया। इस क्रम में उन्होंने धर्म धम्म कांफ्रेंस के मूल तथ्यों पर कहा कि यह आपसी भाईचारे, शांति व अ¨हसा के मार्ग से लबरेज है। अंत में उन्होंने कहा कि इस तीन दिवसिय चौथे धर्म-धम्म कांफ्रेंस में शामिल प्रतिनिधियों के शोध पत्र पर गहन विचार विमर्श के बाद जो भी निचोड़ अस्तित्व में आएगा । वो अनुकरणीय व मानवता के क्षेत्र तथा विश्व बंधुता में कई सकारात्मक परिणाम के अलावा हर वर्ग के लिए एक नया संस्करण होगा ।

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