चुनावी रंग में रगने लगा पाटलिपुत्र लोकसभा सीट

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पाटलिपुत्र लोकसभा सीट अभी नॉमिनेशन की शुरुआत तक नहीं हुई है। लेकिन, चुनावी रंग चटख होने लगा है। किसी न किसी बहाने जनसंपर्क का सिलसिला तेज है। इन सब के बीच वोटर अभी आराम के मूड में हैं। वजह, यहां चुनाव अंतिम चरण में 19 मई को होगा। लिहाजा, अभी कुछ कहने से लोगों को गुरेज है। वैसे मुकाबला पिछली बार की ही तरह इस बार भी रामकृपाल यादव व डॉ. मीसा भारती के बीच तय है। वर्तमान सांसद व केंद्रीय राज्यमंत्री रामकृपाल यादव पाटलिपुत्र सीट से दूसरी बार मैदान में हैं। पटना लोकसभा सीट से वे तीन बार जीत चुके हैं। रामकृपाल 4 बार सांसद और एक बार राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं। जबकि लालू प्रसाद यादव की बेटी राज्यसभा सदस्य डाॅ. मीसा भारती पाटलिपुत्र से दूसरी बार अपनी किस्मत आजमाएंगी। वर्ष 2009 में लालू प्रसाद यादव लड़े थे, लेकिन तब जदयू के डॉ. रंजन प्रसाद यादव ने उन्हें पटखनी दी थी। पटना लोकसभा से 2009 में अलग होकर बने पाटलिपुत्र क्षेत्र में रामकृपाल-मीसा के बीच दूसरी बार मुकाबला दिलचस्प होने वाला है।
हाईप्रोफाइल सीट रहा है पाटलिपुत्र
पटना लोकसभा से अलग होने के बाद 2009 के लोकसभा चुनाव में लालू प्रसाद यादव के लड़ने के कारण पाटलिपुत्र का चुनावी रण देश भर में चर्चित हुआ था। तभी से यह सीट हाई प्रोफाइल माना जाता है। हालांकि उनके पुराने दोस्त रहे डाॅ. रंजन प्रसाद यादव ने उन्हें पटखनी दी थी। फिर 2014 में कभी लालू प्रसाद यादव के करीबी रहे रामकृपाल यादव ने राजद छोड़कर कर भाजपा का दामन थाम लिया। भाजपा ने उन्हें टिकट दिया और वे यहां से जीत कर केंद्र में मंत्री भी बने।

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काफी चर्चा में रहा था चाचा-भतीजी के बीच मुकाबला
िपछले चुनाव में चाचा-भतीजी (रामकृपाल-मीसा) के बीच मुकाबला काफी चर्चा में रहा। रामकृपाल ने पटना संसदीय क्षेत्र में तैयार हो रही भाजपा की जमीन पर 1993 में लालू की सरपरस्ती में ही कब्जा किया था। इससे ठीक पहले ही 1989 में प्रो. शैलेन्द्र नाथ श्रीवास्तव ने पटना को भगवा रंग में रंगते हुए संसद की सीढ़ी चढ़ी थी।
रामकृपाल-मीसा के बीच दूसरी बार होगा मुकाबला
मनेर में आर्सेनिक युक्त पानी की समस्या का नहीं हुआ स्थायी समाधान
पालीगंज में सोन के बालू का मुद्दा सबका तेल निकालेगा। क्योंकि बड़े पैमाने पर अवैध तरीके से मशीनों के जरिए बालू का दोहन हाेने से लोगों में आक्रोश है। सोन तट स्थित कई गांवों में तनातनी की स्थिति है।
पालीगंज बाजार की संकीर्ण सड़क और जाम के कारण लोगों का बुरा हाल है। बाजार से बाहर-बाहर बाईपास निकालने की मांग है।
पालीगंज के चंढ़ोस और मसौढ़ी के सोनमई पंचायत को रामकृपाल ने आदर्श सांसद विकास योजना के तहत गोद लिया था, लेकिन दोनों पंचायतों की स्थिति में कुछ खास बदलाव नहीं हुआ।
मनेर में आर्सेनिक युक्त पानी की समस्या का समाधान करने में सांसद नाकामयाब रहे।
बिहटा में विभिन्न परियोजनाओं के लिए 2007 में जमीन अधिग्रहण हुआ, लेकिन किसान 2014 के नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मुआवजा चाहते हैं। इस मुद्दे पर किसानों का आंदोलन काफी समय से चल रहा है। करीब पांच-छह गांवों के किसान इस मसले पर वोट बहिष्कार के मूड में हैं।
बिक्रम विधानसभा में समय पर सिंचाई के लिए नहर से पर्याप्त पानी नहीं मिलता। 22 में से पांच नलकूप ही चालू है। इसके अलावा किसानों की शिकायत है कि किसानों के सहायतार्थ चल रही योजनाओं का लाभ भी किसानों को नहीं मिल रहा है। बिक्रम का ट्रॉमा सेंटर एक एमबीबीएस के सहारे चल रहा है।
मसौढ़ी में अारअाेबी के शिलान्यास से लाेगाें काे जाम से राहत की उम्मीद बंधी है। लेकिन, बस पड़ाव के लिए अभी तक जमीन मुहैया नहीं हाेने से पाली मोड़ व तारेगना गुमटी के पास जाम की स्थिति बनी रहती है।
दानापुर के दियारा इलाके में बुनियादी सवाल अभी भी माैजूं हैं।
फुलवारीशरीफ के ग्रामीण इलाके में नहर की गाद की सफाई नहीं हाेने से समय पर पानी नहीं पहुंचता है। किसान सिंचाई काे लेकर परेशान रहते हैं। साथ ही कृषि उत्पादाें की बिक्री के बाजार अाैर उचित मूल्य उन्हें नहीं मिल पाता है।
दानापुर के दियारा इलाका के लिए पक्का पुल नहीं बनना अाैर शहरी क्षेत्र में जल जमाव की समस्या बड़ा मुद्दा है।
पाटलिपुत्र लोकसभा को जानिए
2008 के परिसीमन से तीन लोकसभा क्षेत्रों के विधानसभा को लेकर पाटलिपुत्र लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र बना। जहानाबाद से मसौढ़ी, आरा से पालीगंज व मनेर, पटना लोकसभा से फुलवारीशरीफ, दानापुर व बिक्रम विधानसभा को पाटलिपुत्र में शामिल किया गया।

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